बिहार चुनाव पर मज़दूर वर्ग की राय

बिहार चुनाव
Image caption बिहार चुनाव के परिणाम के बाद लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बिहार की स्थिति में सुधार आएगा और वो वापस जा पाएँगे.

चुनाव परिणाम को बदलते बिहार की तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है. ऐसे में हमने दिल्ली में मज़दूरी करने वाले कुछ लोगों से पूछा कि अगर अवसर मिले तो क्या वो बिहार वापस जाना चाहेगें ?

'रोड तो बन गया, अब कोई व्यवस्था बने,कारखाना बने, ताकि रोज़गार पैदा हो सके' बिहार चुनाव को विकास के मुद्दे पर जीत कर आए नीतीश कुमार के लिए ये सुझाव किसी मैनेजमैंट गुरु या विकास मामलो के जानकार के नहीं, बल्कि रिक्शा चलाने वाले सुनिल कुमार का है.

ज़्यादातार लोगों को इंतज़ार है कि बिहार में रोज़गार के अवसर हों ताकि वो अपने प्रदेश वापस जा सके.

सहरसा के सुनिल कुमार कहते है कि,नीतीश सरकार ने उम्मीद तो ज़रूर जगाई है पर अभी भी बिहार में रोज़गार के अवसर इतने ज़्यादा नहीं हैं.

बिहार वापसी

सुनिल कुमार कहते है "मज़दूरी अब भी नहीं मिल रही है, अब भी सौ रुपए ही मिलते है. इतनी महंगाई में क्या होता है. रोड तो बन गया है, कुछ ऐसी व्यवस्था हो कि कारखाने लगें ताकि हम मियाँ-बीबी कमाकर खा सकें. रोड तो बनता रहता है, टूटता रहता है."

सहरसा के ही जावेद को भी अब बिहार में अवसर दिखने लगे है. वो कहते है कि अगर वहाँ लगातार रोज़गार मिले तो सौ रुपये भी ठीक है.

जावेद कहते है " वहाँ मज़दूरी कम है तो खर्चा भी कम है" लेकिन जावेद अब भी मानते है कि ये शुरुआत भर है.

सीतामढ़ी के अख़्तर किसी भी सूरत में दिल्ली में ही काम करना चाहते हैं. अख़्तर कहते हैं "घर मकान वहीं बनाएंगे लेकिन जब तक दिल्ली में कमाई का ज़रिया है तब तक दिल्ली को छोडे़गें नहीं"

Image caption बड़ी संख्या में बिहार से बाहर वहाँ के मज़दूर रोज़ी रोटी के जुगाड़ में जाते हैं.

वजह पूछने पर वो कहते है कि दिल्ली में आमदनी ज़्यादा है सभी सुविधाएं ज़्यादा हैं. बिहार में वो आने में देर लगेगी.

वही ऐसे भी लोग मिले जो कह रहे थे कि ये ग़रीब की सरकार है, मेरी सरकार है.

सहरसा के बिपत राम ने कहा " रोड बन गया है, गाड़ी ठेला चलेगा, बिहार में कमाएंगे-खाएंगे.यहाँ क्यों आंएगे मरने के लिए".

चार साल से दिल्ली में रह रहे मधुबनी के नरेश कहते है कि जब अपने देश में ही रोटी मिले तो कोई बाहर क्यूँ जाएगा.

नरेश कहते है "नीतीश कुमार ने अभी तो कुछ भी नहीं किया है, पर लालू से ज़्यादा किया है. अब उम्मीद है कि नीतीश अगर काम करेगें तो हम वापस जाएंगे.और ये उम्मीद है कि वो बिहार को मंज़िल तक पहुँचाएंगे."

इन लोगों से बात कर लगा कि ये चुनाव परिणाम लोगों की उम्मीद का नतीजा है, और अगले पाँच वर्षों में नीतीश कुमार के सामने जनता की उम्मीदों को पूरा करने की बड़ी चुनौती होगी.

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