'नीतीश की सूनामी, बहे लालू, पासवान'

बिहार चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीत को लेकर मीडिया ने उनकी तारीफ़ों के पुल बांध दिए हैं.

ये सच है कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों के लिए बुधवार को हुई मतगणना में एक तरह से जनता दल-यू और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन के पक्ष में आंधी सी चलती दिखाई दी जिसमें विपक्षी दिग्गज धराशायी हो गए.

चुनावों में लालू-पासवान की जोड़ी धराशायी हो गई और राहुल गांधी का जादू भी नहीं चला.

पंजाब केसरी ने शीर्षक लगाया है- नीतीश की सूनामी, बहे लालू, पासवान और कांग्रेस.

अख़बार लिखता है कि बिहार में नीतीश की सूनामी ने लालू, पासवान और कांग्रेस को जड़ से उखाड़ दिया. इतना प्रचंड बहुमत इससे पहले किसी राज्य में किसी पार्टी को नहीं मिला.

अख़बार का कहना है कि अपने युवराज के दम पर बड़े बड़े दावे करने वाली कांग्रेस तो मानो रसातल में जा धंसी और 'बड़बोले' लालू, राबड़ी और पासवान का गठजोड़ भी चारों खाने जमीन सूंघ गया.

दैनिक जागरण का सुर्खी है- विकास की जय, नीतीश का परचम लहराया, लालू-राहुल के मंसूबे ध्वस्त.

जागरण लिखता है कि बिहार में नीतीश जिस हनक से वापस लौटे हैं, उसका पूरे देश खासतौर से उत्तर भारत की सियासत पर खासा असर होगा.

हिंदुस्तान का शीर्षक है- काम का इनाम.

अख़बार लिखता है कि बिहार विधानसभा चुनाव में विकास और सुशासन की लहर पर सवार नीतीश कुमार की आंधी में सत्तारूढ़ गठबंधन ने 84 फ़ीसदी से ज्यादा सीटों पर कब्ज़ा जमाया, वहीं आरजेडी, एलजेपी और कांग्रेस की करारी हार हुई.

नवभारत टाइम्स ने इसे जवाँ सपनों की जीत करार दिया है.

अख़बार लिखता है कि यह ख़बर उस जवां भारत की है जो नए भविष्य के सपने देख रहा है. देश भर में यह हुआ और अब बिहार की बारी थी. बिहार में नीतीश कुमार ने अपने पहले कार्यकाल में इन जवाँ सपनों को पंख दिए और उन्हें पूरा करने का रोजमैप पेश किया.

नवभारत लिखता है कि जनता ने ऐसी जीत उन्हें गिफ्ट की है जिसकी उन्हें उम्मीद भी नहीं थी.

अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की हेडिंग है- नीतीश लैंडस्लाइड बरीज़ लालू, कांग्रेस यानि नीतीश की भारी जीत में दबे लालू और कांग्रेस.

अख़बार लिखता है कि नीतीश पर सवार होकर भाजपा ने भी ऐतिहासिक जीत हासिल की.

अख़बार ने नीतीश के सामने आने वाली पाँच चुनौतियों को भी गिनाया है. ये हैं- बिजली, पानी, आर्थिक, भूअधिग्रहण और बुनियादी ढांचा.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की हेडिंग है- नीतीश टेक सेंटर स्टेज यानि नीतीश केंद्रीय भूमिका में आए.

अख़बार ने सवाल खड़ा किया है कि क्या वो प्रधानमंत्री के संभावित दावेदार हैं?

टाइम्स के अनुसार बिहार ने राजनीति के सुपरस्टार को जन्म दिया है और अब सवाल उठ रहा है आज का सीएम क्या कल का पीएम है. राजनीतिक पंडित अभी इसे अपरिपक्व सवाल मान रहे हैं लेकिन वे इस संभावना से इनकार भी नहीं कर रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की हेडिंग है- राजनीतीश. अख़बार ने एक अन्य ख़बर छापी है जिसका शीर्षक है- 4/243: राहुल पहली बार चढ़े कसौटी पर.

अख़बार लिखता है कि कांग्रेस ने हिंदीभाषी क्षेत्रों में अपनी वापसी को लेकर राहुल से बड़ी उम्मीदें लगा रखी हैं, लेकिन उसे झटका लगा है.

अमर उजाला का शीर्षक है- विकास को बिहार का सलाम.

अख़बार लिखता है कि नीतीश की सत्ता मे धमाकेदार वापसी हुई है लेकिन आरजेडी के लिए शर्मिंदगी की सबसे बड़ी वजह राबड़ी का हारना है.

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