श्रीनगर के एक हिस्से में कर्फ़्यू

श्रीनगर में कर्फ़्यू

भारत प्रशासित कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के एक हिस्से में प्रशासन ने कर्फ़्यू लगा दिया है.

प्रशासन लोगों को उस इलाक़े में जाने से रोकना चाहती है जहाँ 'मज़ार-ए-शोहदा' यानी 'शहीदों का क़ब्रिस्तान' मौजूद है.

यह वह जगह है जहाँ कश्मीर की आज़ादी के लिए संघर्ष के दौरान मारे गए लोगों को दफ़नाया गया है.

प्रमुख अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी ने लोगों का आह्वान किया है कि वे एक-एक ईंट लेकर वहाँ पहुँचें जिससे वहाँ 'शहीदों की याद में' एक दीवार बनाई जाए.

इसके अलावा जिस इलाक़े में यह क़ब्रिस्तान मौजूद है वह मीर वाइज़ उमर फ़ारुक़ के प्रभाव वाला इलाक़ा है.

गुरुवार को चंडीगढ़ में मीर वाइज़ उमर फ़ारुक़ पर हुए हमले के बाद से ही वहाँ तनाव का माहौल बना हुआ है.

अस्तव्यस्त घाटी

पिछले दो दशकों में अलगवावादी चरमपंथियों और भारतीय सुरक्षा बलों के बीच हुए संघर्ष में पचास हज़ार से अधिक लोग मारे गए हैं.

हाल के बरसों में हालांकि सशस्त्र संघर्ष ख़त्म हो गया है लेकिन पिछले तीन सालों में भारतीय प्रशासित कश्मीर में लोग ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं.

इस साल जून से इन प्रदर्शनों में तेज़ी आई और लगभग चार महीनों तक कश्मीर घाटी में जनजीवन अस्तव्यस्त रहा.

पूरी घाटी कभी अलगाववादियों के आह्वान पर तो कभी प्रशासन के आदेश से कर्फ़्यू के साए में ही रही.

इस दौरान प्रदर्शनकारी पथराव करते रहे और सुरक्षा बल उन्हें रोकने की कोशिश करते रहे. इस संघर्ष में सौ से अधिक लोगों की जानें गईं.

केंद्र और राज्य सरकार की ओर से वार्ता के प्रयास शुरु करने के बाद से इन प्रदर्शनों पर विराम लगा है.

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