जगन पर कार्रवाई की तैयारी

जगन मोहन
Image caption जगन मोहन अपने पिता के निधन के बाद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे

आंध्र प्रदेश के बाग़ी सांसद वाईएस जगनमोहन रेड्डी और कांग्रेस पार्टी के बीच चल रहा तनाव अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया दिखता है.

ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी ने जगन के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई का मन बना लिया है.

एक ओर शनिवार को दिल्ली में अनुशासन समिति की बैठक हुई जिसमें जगन मोहन रेड्डी के ख़िलाफ़ कार्रवाई पर विचार किया गया. तो दूसरी ओर आंध्र प्रदेश से संबंध रखने वाले वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने पहली बार जगन मोहन पर सीधा हमला किया है.

उन्होंने कहा है कि जिस तरह से जगन मोहन के साक्षी टीवी पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ प्रोग्राम दिखाए गए वह दुर्भाग्यपूर्ण है और पार्टी इस मामले से निबटेगी.

उन्होंने कहा कि सब जानते हैं कि जगन ने साक्षी चैनल अपने राजनीतिक उद्देश्य से स्थापित किया था और इसका इस तरह से उपयोग ग़लत है.

जयपाल रेड्डी ने यह टिप्पणी ऐसे समय में की है जब राज्य के नवनियुक्त मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी अपने मंत्रिमंडल के गठन के संबंध में दिल्ली में हैं.

इससे संकेत मिलते हैं कि मंत्रिमंडल में जगन मोहन के किसी वफ़ादार को जगह नहीं मिलेगी और जो पुराने मंत्रिमंडल के सदस्य थे उन्हें अब बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. इनमें विशेषकर पिल्ली सुभाष चंद्र बोस और बी श्रीनिवास रेड्डी का नाम लिया जा रहा है.

अबकी बार मंत्रिमंडल में चालीस प्रतिशत नए चेहरों को अवसर मिलने की संभावना है.

कमज़ोर पड़ती ताक़त

आलाकमान को इस बात से भी जगन के विरूद्ध कार्रवाई का हौसला मिला है कि कांग्रेस विधायक दल में जगन के समर्थक विधायकों की संख्या 10-12 तक सिमट गई है.

जब उनके पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी की मृत्यु हुई थी तो लगभग 150 विधायकों ने जगन मोहन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग का समर्थन किया था.

आलाकमान ने उस मांग को ठुकराते हुए के रोसैया को नेता नियुक्त किया था और उसके बाद से जगन मोहन और आलाकमान के बीच लगातार बढ़ता गया है.

Image caption राजशेखर रेड्डी की राजनीतक विरासत पर पार्टी की भी नज़र है

आलाकमान के मना करने के बावजूद जगन मोहन ने आंध्र प्रदेश के विभिन्न इलाक़ों में अपनी दिलासा यात्रा जारी रखी और इस यात्रा के दौरान काग्रेस सरकार और नेतृत्व पर हमले भी किए.

जगन मोहन के इन तेवरों की वजह से बहुत से विधायक उनसे दूर हट गए.

जो अहम लोग अब जगन मोहन से दूर हो गए हैं उनमें उनके गुरु केपीपी रामचंदर राव और जगन के चाचा वाईएस विवेकानंद रेड्डी शामिल हैं. ऐसे संकेत भी हैं कि विवेकानंद रेड्डी को भी इस बार मंत्री बनाया जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो जगन खेमे के साथ ही साथ उनके परिवार में भी फूट पड़ जाएगी.

जगन और कांग्रेस के बीच दूरी का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जिस समय हैदराबाद में कांग्रेस के चार बड़े केंद्रीय नेता हैदराबाद में नए मुख्यमंत्री के चयन में लगे थे, जगन ने बंगलौर में रहना पसंद किया. इन नेताओं की वापसी के बाद ही वो हैदराबाद लौटे.

इन नेताओं में से किसी ने भी जगन की माँ विद्याकर विजय लक्ष्मी से मिलने की कोशिश नहीं की और ख़ुद विजय लक्ष्मी ने भी विधायक दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया.

विरासत पर नज़र

लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कांग्रेस पार्टी ने राजशेखर रेड्डी को भुला देने का फ़ैसला किया है.

नए मुख्यमंत्री ने ज़ोर देकर कहा है कि सरकार उन तमाम कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखेगी जो वाईएसआर ने शुरु की थी.

इस तरह से शायद कांग्रेस वाईएसआर की राजनीतिक विरासत पर अपना अधिकार जमाए रखना चाहती है.

दूसरी ओर जगन समर्थकों ने अभी से हमले तेज़ कर दिए हैं.

जगन के क़रीबी नेता अंबाती रामबाबू ने जयपाल रेड्डी पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल किया है कि इंदिरा गांधी के विरूद्ध चुनाव लड़ने वाले जयपाल रेड्डी को अनुशासन की बात करने का अधिकार कैसे मिल गया?

संबंधित समाचार