परमाणु बिजलीघर को हरी झंडी

  • 29 नवंबर 2010
जयराम रमेश
Image caption जयराम रमेश ने कहा कि कुछ शर्तों के साथ योजना को हरी झंडी दी गई है

भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले में फ़्रांसीसी कंपनी अरेवा के सहयोग से बनने वाले परमाणु बिजली घर को हरी झंडी दे दी है.

कुछ ही दिनों के अंदर फ़्रांस के राष्ट्रपति निकोला सार्कोज़ी भारत की यात्रा पर आने वाले हैं. उनकी यात्रा से ठीक पहले इस फ़ैसले को काफ़ी अहमियत दी जा रही है.

रत्नागिरी के तटीय इलाक़े में बनने जा रहे इस रिएक्टर को लेकर स्थानीय लोगों और कुछ संगठनों ने विरोध किया था.

पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने जैतापुर परमाणु बिजली घर के निर्माण को हरी झंडी देने के बारे में कहा कि 35 शर्तों और सुरक्षा के उपायों के बाद ये फ़ैसला किया गया है.

विकल्प

उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा कोयले से ज़्यादा साफ़-सुथरा विकल्प है. जयराम रमेश ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने इस बिजली घर के चलते पर्यावरण पर होने वाले असर के बारे में और अध्ययन कराने की मांग की है.

हाल के महीनों में पर्यावरण मंत्रालय ने स्टील और खनन उद्योग की कई परियोजनाओं पर रोक लगाई है.

वर्ष 1974 में पोखरण परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर असैनिक परमाणु सहयोग के लिए पाबंदी लगाई गई थी. लेकिन 34 वर्ष बाद वर्ष 2008 में भारत और अमरीका के बीच समझौते के बाद ये पाबंदी हट गई थी.

अमरीका के अलावा फ़्रांस ने भी भारत के साथ परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है. एक अन्य प्रमुख देश रूस ने भी भारत ने ऐसा ही समझौता किया है.

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