टाटा जाएँगे अदालत में

Image caption रतन टाटा का कहना है कि टेप लीक होने से निजी गोपनीयता का हनन हुआ है

टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा ने कहा है कि वे टू-जी टेलीफ़ोन घोटाले से जुड़े ऑडियो टेप के लीक होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में जा सकते हैं.

टाटा संविधान के अनुच्छेद 32 का हवाला देते हुए निजी गोपनीयता के हनन का मामला दाख़िल करके उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग कर सकते हैं जिन्होंने टाटा समूह की जनसंपर्क प्रतिनिधि नीरा राडिया के साथ हुई कई लोगों को बातचीत के टेप कुछ पत्रकारों को दिए.

इन ऑडियो टेपों में नीरा राडिया कई वरिष्ठ पत्रकारों, नेताओं और उद्योगपतियों से अन्य प्रभावशाली लोगों के बारे में बातचीत करती सुनी जा सकती हैं, जिनमें रतन टाटा भी शामिल हैं.

संविधान के अनुच्छेद 32 तहत कोई भी व्यक्ति जिसे लगता है कि उसके मूलभूत अधिकारों का हनन हुआ है वह सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटा सकता है.

एनडीटीवी के कार्यक्रम 'वाक द टॉक' में दिए गए इंटरव्यू में रतन टाटा ने संभवतः सोमवार को दायर की जाने वाली याचिका के बारे में इससे अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया.

केंद्रीय गृह सचिव की अनुमति से नीरा राडिया के टेलीफ़ोन कॉल्स की रिकॉर्डिंग आयकर विभाग ने की थी क्योंकि उन्हें टैक्स घपले का शक था, वर्ष 2009 में हुई इन रिकॉर्डिंगों के विवरण लगभग दस दिन पहले 'द ओपन' नाम की पत्रिका ने प्रकाशित किए थे.

इन टेपों के सामने आने के बाद उद्योगपतियों, नेताओं और पत्रकारों के गिरोहबंद होकर काम करने को लेकर बहस तेज़ हो गई है.

रतन टाटा का कहना है कि "जाँच एजेंसियों और सरकारी विभागों को विशेष परिस्थितियों में लोगों के फोन टेप करने की अनुमति है लेकिन उसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा या कानूनी ज़रूरत को पूरा करना होता है, यह काम बहुत ज़िम्मेदारी के साथ किया जाना चाहिए लेकिन इस मामले में उस ज़िम्मेदारी के भाव की कमी दिखती है".

नीरा राडिया से भारत सरकार का प्रवर्तन निदेशालय टैक्स के कई मामलों में पूछताछ कर रहा है.

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