'जो रोल करुँ वो बढ़िया हो जाए'

अभिमन्यु सिंह ( रक्तचरित का सीन)
Image caption अभिमन्यु मूलत: गया के हैं लेकिन उनका पालन पोषण पटना में हुआ और पढ़ाई दिल्ली में.

मुंबई फ़िल्मोद्योग में छोटे शहरों के लोग अब धीरे धीरे अपना मुकाम बना रहे हैं. इस श्रृंखला में आपको मिलवा रहे हैं ऐसे ही कुछ लोगों से जो संघर्ष की सीढ़ी चढ़ कर फ़िल्मोद्योग में सफल हुए हैं. अभिमन्यु सिंह उन अभिनेताओं में से हैं जो किसी परिचय का मोहताज नहीं रहे.

बुक्का रेड्डी और रणसा का चरित्र निभाने वाले अभिमन्यु सिंह के घरवाले पहले चाहते थे कि वो आईएएस बनें लेकिन अभिमन्यु ने एक्टिंग को अपना करियर चुना और अपनी पहचान बनाई.

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अभिमन्यु को एक्टिंग करियर में संघर्ष के दौरान परिवार का भी काफ़ी समर्थन मिला.

अभिमन्यु की पैदाइश बिहार में हुई और वो पढ़ने में बहुत अच्छे थे. दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज में पढ़ने वाले अभिमन्यु ने क्या कभी आईएएस बनने की सोची?

वो कहते हैं, "स्टीफन्स के मेरे कुछ सीनियर आईएएस हैं. जब उनसे बात की तो लगा कि वो दुःखी हैं. उन्हें ऐसे राजनेताओं के अधीन काम करना पड़ रहा था जो उन्हे पसंद नहीं आ रहा था. तब मुझे लगा कि आईएएस मेरे काम की चीज़ नहीं है. मैं अपने मन के मुताबिक काम करना चाहता था."

लंबे और स्मार्ट अभिमन्यु को कॉलेज के दिनों से ही मॉडलिंग का कुछ कुछ काम मिलने लगा था. बाद में वो मॉडलिंग के काम से ही मुंबई पहुंचे जहां उनकी मुलाक़ात मकरंद देशपांडे से हुई और फिर वो मुंबई के होकर रह गए.

मकरंद से सीखने के अपने अनुभव बताते हुए वो कहते हैं, "जब मैं पहली बार मकरंद जी के पास सीखने गया तो उन्होंने कहा झाड़ू लगाओ. मैंने लगाया. दो महीने तक बैकस्टेज से लोगों को एक्टिंग करते देखता था. दो महीने बाद स्टेज पर उतरा तो मुझे स्टेज पर खड़ा होना भी नहीं आ रहा था. लेकिन उन्होंने कहा कि मेरे अंदर एक स्पार्क है."

अभिमन्यु आठ साल तक थिएटर करते रहे और इसी दौरान उन्हें कई टीवी सीरियलों में काम करने का भी मौका मिला. वो कहते हैं, "मैं तो चुन नहीं सकता था. जो मिलता था वही कर लेता था. जो काम मिल जाए वही अच्छा, लेकिन तनाव बाद में हुआ."

Image caption अभिमन्यु की बड़ी फ़िल्म अक्स फ़्लॉप हुई और उन्हें अनुराग कश्यप की गुलाल से पहचान मिली

अमिताभ बच्चन के साथ अभिमन्यु को अक्स में काम करने का मौका मिला. फ़िल्म फ़्लॉप हुई और अभिमन्यु को झटका लगा.

वो भावुक होते हुए बताते हैं, "वो संघर्ष था कि अमित जी के साथ मौका मिला और फिर भी नोटिस नहीं हो पाया. वो बहुत दुखद दौर था. मेरे पिताजी आरबीआई में काम करते हैं लेकिन वो संस्कृत के विद्वान हैं. उनसे बात हुई तो उन्होंने एक ही बात कही, कि कार्यम साध्यामि वा शरीरं पाप्यामि वा, मतलब या तो कार्य की सिद्धि होगी या शरीर नष्ट होगा. बस मैं यही सोच कर फिर से लग गया."

अभिमन्यु का बड़ा मौका अनुराग कश्यप की गुलाल को कहा जा सकता है.

गुलाल में रणसा के चरित्र और डॉयलॉग ने अभिमन्यु को नई पहचान दी जिसके बाद रामगोपाल वर्मा ने रक्तचरित्र में उन्हें बुक्का रेड्डी की महत्वपूर्ण भूमिका दी.

लेकिन क्या छोटे शहर का होना मुंबई फ़िल्मोद्योग की सफलता में आड़े आता है?

वो कहते हैं, "मैं इसे अलग ढंग से देखता हूं. बड़े शहर में सब एक समान होता है. छोटे शहरों के लोगों की अपनी एक आइडेंटिटी यानी पहचान होती है. सबका अपना अलग चरित्र होता है. ये बहुत बड़ी बात है और इसकी गंभीरता को समझना चाहिए. आज अगर छोटे शहरों के लोग मुंबई में सफल हो रहे हैं तो इसका ये कारण भी है कि वो अलग सोचते हैं."

अभिमन्यु फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बना रहे हैं और वो कहते हैं कि उनका सपना बस यही है कि जो रोल वो करें वो रोल बढ़िया करें.