मणिपुर के विद्रोही नेता गिरफ़्तार

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के एक बड़े विद्रोही नेता राजकुमार मेघेनको औपचारिक तौर पर ‘गिरफ़्तार’ कर लिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि राजकुमार को बिहार की एक अदालत में पेश किया गया.

राजकुमार मेघेन प्रतिबंधित यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ़्रंट के चेयरमैन हैं. राजकुमार को दो महीने पहले बांग्लादेश से पकड़ा गया था.

परिवारवालों ने पुष्टि की है कि राजकुमार को बिहार में मोतीहारी की एक अदालत में पेश किया गया और तीन दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है.

पूर्वी चंपारन ज़िले के पुलिस अधिक्षक पारस नाथ ने बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर को बताया है कि विद्रोही नेता को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने पकड़ा जिसने बिहार पुलिस की मदद माँगी थीं.

पारस नाथ ने बीबीसी को बताया, “एनआईए ने हमसे मदद मांगी थी कि राजकु्मार को कोर्ट में पेश किया जा सके. जबकि कुछ भारतीय चैनल कह रहे हैं कि राजकुमार मेगन को बिहार और मणिपुर पुलिस ने संयुक्त छापे में पकड़ा है.”

बांग्लादेश में अभियान

वहीं राजकुमार मेघेन के बेटे ने कहा है कि परिवारवाले इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि आख़िरकार ये बता दिया गया है कि वे गिरफ़्तार हुए हैं. बेटे ने कहा कि अब क़ानूनी मदद ली जा सकेगी.

मोतीहारी में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस बात को लेकर स्पष्ट नहीं है कि राजकुमार को पूछताछ के लिए दिल्ली ले जाया जाएगा या मणिपुर.

बीबीसी ने राजकुमार को ढाका से पकड़े जाने और दिल्ली लाए जाने की ख़बर 13 अक्तूबर को दी थी.

यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ़्रंट के प्रवक्ता तोंबी सिंह ने बीबीसी को बताया कि राजकुमार मेघेन को बांग्लादेश पुलिस ने 29 सितंबर को ढाका में पकड़ा था.

तोंबी सिंह ने कहा, “राजकुमार को बांग्लादेश से भारत लाया गया था जहाँ भारतीय अधिकारियों ने काफ़ी कोशिश की थी कि वे भारत से बातचीत पर हामी भर दें. जब उन्होंने इनकार कर दिया तो ये दर्शाया गया कि राजकुमार को बिहार में गिरफ़्तार कर लिया गया है.”

प्रवक्ता के मुताबिक भारत में दो महीनों तक राजकुमार को दिल्ली में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के किसी सुरक्षित ठिकाने पर रखा गया.

लेकिन एनआईए का कहना है कि वो भारत-नेपाल सीमा पर राजकुमार की गतिविधियों पर नज़र रखे हुई थी जिसके बाद उसे पकड़ा गया.

वहीं एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भारत और बांग्लादेश से कहा था कि वो राजकुमार के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाएँ.

राजकुमार मेघेन की पत्नी ने भी संयुक्त राष्ट्र से अपील की है कि वो उनके पति को ढूँढने में मदद करे और कोर्ट में याचिका भी दायर की है.

यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ़्रंट

भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा विद्रोहियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाए जाने के बाद से सैकड़ों मणिपुरी पिछले कई सालों में ग़ायब हो चुके हैं. इनमें से कई लोग मृत पाए गए थे.

यहाँ 12 से भी ज़्यादा विद्रोही संगठन सक्रिय हैं.

राजकुमार मेघेन पिछले तीन दशकों से यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ़्रंट के अध्यक्ष हैं. ये पूर्वोत्तर में सबसे पुराना विद्रोही गुट है.

इसका गठन 1964 में हुआ था और मकसद था मणिपुर को भारत से आज़ादी दिलाना. माना जाता है कि उसमें पाँच हज़ार लोग हैं.

ये एकमात्र गुट है जो भारतीय सेना के अभियान के बावजूद बर्मा सीमा के साथ मणिपुर के कुछ इलाक़ों पर कब़्ज़ा जमाने में सफल रहा है.

बांग्लादेश में 2009 में शुरु हुए अभियान के बाद से वो 50 से ज़्यादा नेताओं और विद्रोहियों को भारत के हवाले कर चुका है.

कई विद्रोही बांग्लादेश से भाग गए हैं ताकि उन्हें पकड़ा न जा सके.

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