प्रेमजी ने दिया 9000 करोड़ रूपए का दान

अज़ीम प्रेमजी
Image caption अज़ीम प्रेमजी ने विप्रो में अपनी हिस्सेदारी कम करके यह दान दिया है

भारत की बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में से एक विप्रो के संचालक अज़ीम प्रेमजी ने 8846 करोड़ रुपए दान देने की घोषणा की है.

अजीम प्रेमजी की ओर से घोषणा की गई है कि वे अपने 21.3 करोड़ शेयर 'अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन'को देने जा रहे हैं.

यह संस्था विभिन्न सामाजिक कार्य करती है और ग़ैर-लाभकारी कार्यों के लिए धन मुहैया करवाती है.

अज़ीम प्रेम जी ने जो धन दान में देने की घोषणा की है उसका इस्तेमाल मुख्य रूप से देश में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए किया जाएगा.

इस ट्रस्ट की विशेषता यह भी है कि इस ट्रस्ट के सिद्धांतों और जिन पर उसे धन मुहैया करवाया जा रहा है उसमें परिवर्तन नहीं किया जा सकता.

अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अज़ीम प्रेमजी के शेयर सात दिसंबर तक ट्रस्ट को ट्रांसफ़र कर दिए जाएँगे.

इन शेयरों के ट्रस्ट के पास आने के बाद विप्रो में प्रेमजी की हिस्सेदारी 79.42 से घटकर 68.42 रह जाएगी.

'बेहतर समाज के लिए'

अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2001 में की गई थी.

अपनी स्थापना के बाद से ही यह संस्था ग्रामीण क्षेत्रों में काम करती रही है. संस्था का कहना है कि उसने राज्य सरकारों से साथ मिलकर शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कई कार्यक्रम चलाए हैं.

संस्था का कहना है कि उनके कार्यक्रमों से इन वर्षों में 25 हज़ार स्कूलों के 25 करोड़ बच्चे लाभांवित हुए हैं.

कंपनी का अपना एक अंश इस संस्था को दाने में देने की घोषणा करते हुए अज़ीम प्रेमजी ने कहा, "एक न्याय संगत, निष्पक्ष, मानवीय और दीर्घकालिक समाज की स्थापना में शिक्षा की भूमिका अहम है. हम भारत में शिक्षा में सुधार की दिशा में योगदान देना चाहते हैं जिससे कि एक बेहतर समाज का निर्माण हो सके."

फाउंडेशन की ओर से बंगलौर में एक विश्वविद्यालय की भी स्थापना की जा रही है. हाल ही में कर्नाटक सरकार ने इसे मंज़ूरी दी है. संभावना है कि वर्ष 2011 में यह तैयार हो जाएगा.

अज़ीम प्रेमजी का कहना है कि यह फ़ाउंडेशन समाज के वंचित और प्रतिकूल परिस्थितियों में रहने वाले लोगों के हित में काम करना चाहती है.

पहली बार किसी भारतीय उद्योगपति ने इतनी बड़ी राशि दान में देने की घोषणा की है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिल गेट्स और वारेन बफ़ेट इस तरह के दान देते रहे हैं.

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