समझौता एक्सप्रेस मामले में पूछताछ शुरु

  • 2 दिसंबर 2010
Image caption समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को विस्फोट हुआ था. इस धमाके में 68 लोग मारे गए थे.

भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अजमेर सत्र न्यायालय से अजमेर धमाकों के आरोप में जेल में बंद लोगों से समझौता एक्सप्रेस मामले में पूछताछ की अनुमति मिल गई है.

भारत और पाकिस्तान के बीच हर हफ्ते चलने वाली समझौता एक्सप्रेस में 18 फरवरी 2007 को विस्फोट हुआ था. इस धमाके में 68 लोग मारे गए थे.

राजस्थान में पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने अपनी जाँच में संकेत दिया था कि समझौता एक्सप्रेस में हुए धमाके में इन्हीं लोगों का हाथ हो सकता है.

इस बीच मध्य प्रदेश पुलिस ने एक हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या के संबध में अजमेर धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार हर्षद सोलंकी को हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है. सुनील जोशी को अजमेर धमाकों की अहम कड़ी माना जाता था. हर्षद गुजरात के बेस्ट बेकरी कांड में भी आरोपी हैं.

न्यायिक हिरासत में पूछताछ

अजमेर सत्र न्यायालय ने एनआईए को 11 अक्टूबर को हुए अजमेर धमाकों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए देवेन्द्र गुप्ता और लोकेन्द्र शर्मा से भी न्यायिक हिरासत में पूछताछ की इजाज़त दे दी है.

एनआईए ने अदालत में कहा कि ये दोनों एक हिन्दू संगठन से जुड़े रहे हैं और समझौता एक्सप्रेस धमाकों में इनकी भूमिका की जानकारी मिली है. देवेन्द्र और लोकेश से अजमेर जेल में ही पूछताछ की जाएगी.

एनआईए इन दोनों से 10 दिन तक पूछताछ कर सकती है. एनआईए ने इसके लिए राजस्थान पुलिस की ओर से अजमेर धमाकों में दाखिल चार्जशीट के विवरण को आधार बनाया है.

एक सी रणनीति

Image caption अजमेर धमाकों में भी उन्ही तरीकों का इस्तेमाल किया गया था जिनके ज़रिए समझौता एक्सप्रेस विस्फोट को अंजाम दिया गया.

इस चार्जशीट में पुलिस ने कहा कि समझौता एक्सप्रेस में हुए विस्फोट के सबूत और तरीके इंगित करते हैं कि इस घटना में भी अजमेर धमाकों में पकड़े गए लोगों का हाथ हो सकता है.

समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री, उपकरण और लोग मध्य प्रदेश के इंदौर से वास्ता रखते हैं. अजमेर घटना में भी यही लोग शक के दायरे में हैं और वैसे ही सामग्री की इस्तेमाल किया गया है.

एनआईए की टीम इस वक्त अजमेर में है और पूछताछ में जुटी है.

हर्षद सोलंकी से पूछताछ के दौरान पुलिस इस मामले की पड़ताल करेगी कि जोशी की हत्या कहीं धमाके के राज़ छिपाने की नियत से तो नहीं की गई.

जोशी की हत्या 29 दिसम्बर 2007 को रहस्यमय हालत में गोली मार कर कर दी गई थी.

प्रारंभिक जांच के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने जोशी की हत्या की फ़ाइल ठंडे बस्ते में डाल दी थी.

पुलिस की ख़ामोशी

पुलिस के अनुसार, हत्या के एक साल पहले तक जोशी के साथ राज, मेहुल, उस्ताद और घनश्याम नाम के व्यक्ति छाया की तरह लगे रहते थे. लेकिन जोशी की हत्या के बाद ये सभी गायब हो गए.

मध्य प्रदेश से जांच कर लौटे राजस्थान पुलिस के एक अधिकारी ने बीबीसी से बातचीत में बताया, ''ये चारों लोग न केवल जोशी की हत्या के फ़ौरन बाद फरार हो गए बल्कि जाते समय जोशी के मकान को ऐसे खंगाल गए जैसे कोई तूफान कमरे के भीतर से गुज़रा हो.''

राजस्थान पुलिस ने जांच के दौरान जाना कि राज नाम का व्यक्ति और कोई नहीं बल्कि गुजरात के बेस्ट बेकरी मामले का आरोपी हर्षद ही था.

मेहुल, घनश्याम और उस्ताद का अब भी कोई पता नहीं चला है. मगर इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस की ख़ामोशी पर सवाल उठाए जा रहे हैं.

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