ग्राम रोज़गार सेवकों पर लाठीचार्ज

Image caption उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया

पुलिस ने राजधानी लखनऊ में शहीद स्मारक स्थल पर हज़ारों की संख्या में उग्र प्रदर्शन कर रहे ग्राम रोज़गार सेवकों पर लाठीचार्ज और हवाई फायरिंग की.

घबराहट में सैकड़ों प्रदर्शकारी गोमती नदी में कूद गए. गनीमत थी कि कोई बड़ी दुर्घटना नही हुई और बाद में प्रदर्शनकारी सुरक्षित निकल आए.

रोज़गार सेवक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के तहत ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक सहायक के रूप में काम करते हैं.

ये लोग सरकार के उस आदेश से नाराज़ हैं जिसके अनुसार तीन साल तक काम कर चुके रोज़गार सेवकों को हटाकर उनकी जगह नई नियुक्तियां की जाएंगी.

ग्राम रोज़गार सेवक संघ की मांग है कि सरकार अपने आदेश बदले और नवीनीकरण की व्यवस्था को समाप्त कर रोजगार सेवकों को लगातार काम करने दिया जाए. संघ रोज़गार सेवकों का मानदेय बढ़ाकर पांच हजार करने की भी मांग कर रहा है.

वृहस्पतिवार को क़रीब दस हज़ार रोज़गार सेवक शहीद स्मारक स्थल पर धरना देने पहुंचे.

ग्राम विकास विभाग के अधिकारियों ने इनके एक प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया.

प्रतिनिधिमंडल ने लौटकर बताया कि उन्हें मौखिक आश्वासन मिला है.

इस पर वहाँ मौजूद सैकड़ों प्रदर्शनकारी नाराज हो गए. इन लोगों के पुलिस चौकी और कई विज्ञापन पटों में तोड्फोड़कर आग लगा दी.

इस पर पुलिस ने वाटर कैनन से पानी की तेज बौछारें छोडीं,लाठी चार्ज किया और हवाई फायरिंग की.

शहीद स्मारक के सामने संकरी सड़क पर पुलिस थी इसलिए घबराहट में प्रदर्शनकारी नदी की तरफ दौड़े और पानी में कूद गए.

पुलिस वालों ने उन्हें वहाँ भी दौडाकर पीटा लेकिन बाद में उन्हें घाट पर वापस बुला लिया.

जिला मजिस्ट्रेट अनिल सागर का कहना ही रोज़गार सेवकों में आपस में दो गुट हो जाने से ये स्थिति आई. उनका कहना है कि हल्का बल प्रयोग करके स्थिति को काबू में कर लिया गया है.

सरकार की आलोचना

विपक्षी दलों कांग्रेस,समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी ने सरकार और पुलिस के रवैये की कड़ी आलोचना की है.

विपक्ष का कहना है कि माया सरकार लोगों की बात सुनने के बजाय लाठी,गोली से बात करती है.

शहीद स्मारक हाईकोर्ट और रेजीडेंसी के पास गोमती बंधे पर बना है. उसके सामने केवल एक सड़क है जो पुराने और नये लखनऊ को जोड़ती है.

यह सड़क मेडिकल कालेज और बलरामपुर जाने के लिए भी इस्तेमाल होती है.

माया सरकार ने धरनास्थल विधानसभा के सामने से हटाकर शहीद स्मारक भेज दिया है.

इस कारण यहाँ अक्सर यातायात जमा रहता है लेकिन जिस तरह आज पुलिस के डर से प्रदर्शनकारी नदी में कूदे , उससे आशंका है कि यहाँ कभी गंभीर दुर्घटना हो सकती है.

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