माओवादियों को ज़हर खिला कर मारा?

  • 3 दिसंबर 2010

बिहार के मुंगेर ज़िले में माओवादी प्रवक्ता ने कहा है कि दस माओवादियों को ज़हर खिलाकर मार दिया गया है.

उधर पुलिस ने इस ख़बर के बारे में अब तक सिर्फ़ इतना स्वीकार किया है कि घटनास्थल के पास गंगा नदी से जो चार लाशें मिली हैं, उनमें तीन नक्सली और एक ग्रामीण के शव हैं.

ये घटना रविवार 28 नवंबर की बताई जा रही है . पुलिस अगले पांच दिनों तक यही कहती रही कि ज़िले के गंगा दियारा इलाक़े में अपराधी गिरोह और नक्सली दस्ते के बीच ख़ूनी भिडंत हुई,जिसमें कई नक्सली मारे गए हैं.

हालांकि मुंगेर के पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार नायक ने शुक्रवार को बीबीसी के साथ टेलीफ़ोन पर बातचीत में ये स्वीकार किया था कि हो सकता है ख़ूनी टकराव से पहले दोनों गिरोह एक साथ वहाँ खाने-पीने इकट्ठे हुए हों.

पुलिस अधीक्षक ने ये भी कहा कि बरामद लाशों के पोस्टमार्टम या विसरा -जाँच और वहाँ मिले खाने-पीने के समान की जांच रिपोर्ट मिल जाने पर ही ज़हर वाली बात की पुष्टि हो सकती है.

मामले की जाँच

उस क्षेत्र में सक्रिय माओवादी संगठन के प्रवक्ता अविनाश ने शुक्रवार सुबह टेलीफ़ोन पर बीबीसी को बताया कि मुंगेर और खगडिया ज़िले के गंगा तटवर्ती सीमा क्षेत्र में 28 नवंबर को उनके 10 साथी (माओवादी) एक छल-प्रपंच के शिकार हुए.

उन्होंने कहा '' जिस तरह खाने में ज़हर मिलाकर कुछ लोगों ने धोखे से माओवादी साथियों की जान ली, उसकी हम घोर निंदा करते हैं, और इस जघन्य हत्या के ख़िलाफ़ हर वर्ग से आवाज़ उठाने की अपील करते हैं.''

माओवादी प्रवक्ता ने इस बाबत और ज़्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन कुछ स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि गंगा दियारा इलाक़े में बिन्द समुदाय के उन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया, जो माओवादियों से मदद लेते रहे हैं.

इनके मुताबिक़ जब माओवादियों ने उन्ही गाँव वालों से ' लेवी ' वसूली और गाँव के युवकों की नक्सली दस्ते में भर्ती का दबाव बढ़ा दिया, तब ' मांस-मदिरा ' वाली पार्टी में नक्सलियों को आमंत्रित करके ये ख़ूनी खेल खेला गया.

कहा जा रहा है कि खीर, मछली, मुर्गा, दारू वगैरह परोसे गए थे और उन्हीं में से किसी में ज़हर मिला दिया गया था.

पुलिस का भी कहना है कि घटनास्थल से मिली चीज़ों से ये पता चलता है कि पहले खिला-पिला कर और बाद में गोलियां चलाकर माओवादियों को मौत के घाट उतारा गया होगा.

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