नोएडा पार्क को सशर्त मंज़ूरी

  • 3 दिसंबर 2010

उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा पार्क के निर्माण को शर्तों के तहत मंज़ूरी दे दी है.

कोर्ट ने शुक्रवार को अपने फ़ैसले में कहा कि पार्क का निर्माण कार्य दोबारा शुरु हो सकता है लेकिन शर्त ये है कि पक्का निर्माण काम केवल 25 फ़ीसदी हिस्से में ही किया जा सकता है.

कोर्ट के अनुसार पार्क का 75 फ़ीसदी हिस्सा हरा-भरा होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने ये माना है कि पार्क जंगली क्षेत्र नहीं है पर इस बात पर चिंता ज़रूर जताई कि ये ओखला पक्षी विहार के नज़दीक है.

इसीलिए कोर्ट ने कहा है कि पार्क में निर्माण कार्य तभी शुरु होगा जब 75 प्रतिशत हिस्से में हरियाली होगी.

शर्तें

माया सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत किया है. जबकि विपक्ष का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त अनुमति देकर माया सरकार पर अंकुश लगाया है.

कोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई के बाद एक साल पहले इस पार्क के निर्माण काम पर रोक लगा दी थी.

याचिका में कहा गया था कि इस योजना के लिए पर्यावरण और वन मंत्रालय से मंज़ूरी लेना ज़रूरी है क्योंकि ये पार्क पक्षी विहार के काफ़ी नज़दीक है.

याचिकाकर्ताओं के वकील जयंत भूषण का कहना है कि चूँकि सरकार ने पहले पर्यावरण नियमों और कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया था , इसलिए अब कोर्ट ने सरकार के कामकाज पर निगाह रखने के लिए एक समिति बना दी है.

कोर्ट की शर्तें मानीं जा रहीं हैं या नहीं इस पर ये समिति नज़र रखेगी.

डॉक्टर अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन संग्रहालय नाम से यह पार्क नोएडा के सेक्टर १४ और १५ के सामने यमुना तट पर बन रहा है.

पार्क में कई दलित नेताओं की प्रतिमाएँ बनाई गई हैं.

अपने पहले कार्यकाल में भी मायावती ने कई भव्य स्मारकों का निर्माण किया था.

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