'परमाणु हथियार के समान सामग्री बचाकर रखी है'

  • 8 दिसंबर 2010
विकीलीक्स

अमरीका से जुड़ी लाखों विवादित जानकारियाँ इंटरनेट पर सार्वजनिक करने वाली वेबसाइट विकीलीक्स के सांस्थापक जूलियन असांज के वकील ने बीबीसी को बताया है कि असांज ने कुछ ऐसी सामग्री को बचाकर रखा है जो उन्हें या उनकी वेबसाइट को कुछ होने पर सार्वजनिक की जाएगी.

विकीलीक्स ने हाल में अमरीकी कूटनीतिक दफ़्तरों से भेजे गए अनेक केबल सार्वजनिक किए हैं.

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इनसे अमरीकी सरकार के प्रतिनिधियों की सऊदी अरब, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, चीन, दक्षिण कोरिया के साथ हुई बातचीत और उनके अनेक देशों के बारे में समय-समय पर बनी सोच और विचारों की झलक मिलती है.

अमरीकी सरकार इससे काफ़ी विचलित है और उसने ज़ोर देकर कहा है कि ऐसा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित में नहीं है.

'परमाणु हथियार के समान सामग्री'

वेबसाइट विकीलीक्स के सांस्थापक जूलियन असांज के वकील मार्क स्टीफ़ंस ने बीबीसी को बताया कि जो जानकारियों असांज ने बचाकर रखी हैं वो इंटरनेट के युग के लिए 'परमाणु हथियार' के समान हैं.

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हाल में जूलियन असांज के ख़िलाफ़ स्वीडन में एक कथित बलात्कार और छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है और उनके ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय पुलिस इंटरपोल ने एक नोटिस भी जारी किया है.

असांज स्वीडन में ख़ुद पर लगाए गए आरोपों को ख़ारिज करते हैं.

उनके वकील मार्क स्टीफंस ने बीबीसी के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि असांज के ख़िलाफ़ तैयार किया जा रहा बलात्कार का मामला राजनीति से प्रेरित है और यदि उन्हें स्वीडन प्रत्यर्पित किया गया तो उन्हें अंत में अमरीका भेज दिया जाएगा.

विकीलीक्स की ओर से जारी की गई ताज़ा जानकारियों में ऐसे संकेत दिए गए हैं कि एक साल पहले सर्च इंडन गूगल पर हुए साइबर हमलों के पीछे वरिष्ठ चीनी अधिकारियों का हाथ हो सकता है.

बंद होकर फिर शुरु हुई विकीलीक्स

कुछ ही दिन पहले विकीलीक्स की वेबसाइट कुछ घंटे तक बंद रहने के बाद फिर शुरु हुई.

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जो कंपनी विकीलीक्स को डोमेन सेवाएं दे रही थीं उसने अपने ढाँचे को ख़तरे का हवाला देते हुए विकीलीक्स की साइट को बंद कर दिया था.

इसके बाद विकीलीक्स ने स्विट्ज़रलैंड में एक नई डोमेन कंपनी के साथ अपनी वेबसाइट शुरु कर दी.

इससे पहले विकीलीक्स की सेवाएँ ख़त्म करने वाली कंपनी एवरीडीएनएस डॉट नेट (everyDNS.net) ने कहा था कि वेबसाइट को इसलिए बंद करना पड़ा क्योंकि उस पर व्यापक रुप से साइबर हमले हो रहे थे.

कंपनी का तर्क था कि इन हमलों की वजह से उनके पूरे इंफ़्रास्ट्रक्चर या ढाँचे को ख़तरा पैदा हो गया और इसकी वहज से उन हज़ारों वेबसाइटों को ख़तरा पैदा हो गया था जिनका डोमेन इस कंपनी के पास था.

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