केंद्र और थॉमस को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने सीवीसी के मामले में संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त पीजे थॉमस से संबंधित अलग अलग मामलों में केंद्र सरकार और थॉमस को नोटिस जारी किए हैं.

मामले की अगली और आखिरी सुनवाई 27 जनवरी को तय की गई है.

विवादास्पद केंद्रीय सतर्कता आयुक्त थॉमस को पद से हटाए जाने संबंधी याचिका पर थॉमस को नोटिस दिया है जबकि केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस दिया गया है जिसमें थॉमस की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए थे.

पीजे थॉमस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और इसी वजह से केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के रुप में उनकी नियुक्ति पर विवाद हो रहा है.

मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ का कहना था, ‘‘ हमने फाइल देखी है और हम इस मामले पर आखिरी सुनवाई करेंगे.’’ इस मामले पर कोर्ट ने थॉमस और केंद्र सरकार दोनों से सफाई मांगी है.

अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने सरकार की तरफ से नोटिस स्वीकार किया लेकिन सीवीसी की तरफ से नोटिस स्वीकार करने से मना कर दिया.

अटार्नी जनरल का कहना था, ‘‘मैं थॉमस की तरफ से नोटिस स्वीकार नहीं कर सकता.’’ इस मामले में स्वयंसेवी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटीगेशन (सीपीआईएल) की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि अटार्नी जनरल वाहनवती सीवीसी की तरफ से भी नोटिस स्वीकार कर सकते हैं लेकिन वाहनवती ने ये नोटिस नहीं लिया.

खंडपीठ का कहना था कि वो इस मामले की आखिरी सुनवाई करना चाहते हैं.

इस मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले प्रशांत भूषण का कहना था कि ये एक बड़े पद से जुड़ा गंभीर मामला है और इस पर जल्दी सुनवाई होनी चाहिए.

प्रशांत भूषण ने कहा कि वो इस मामले से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का नोटिस स्वयं पीजे थॉमस को जाकर सौंपेंगे.

अदालत ने मामले की सुनवाई 27 जनवरी तक निर्धारित करते हुए कहा कि इससे जुड़े सारे आवेदन 27 जनवरी से पहले पूरे हो जाएं.

पीजे थॉमस इसी वर्ष सात सितंबर को केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के रुप में नियुक्त हुए थे.

थॉमस की नियुक्ति का दो स्वयंसेवी संगठनों ने विरोध किया था. सीपीआईएल के अलावा पूर्व चुनाव आयुक्त जेएम लिंग्दोह समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने थॉमस की नियुक्ति पर आपत्ति की थी और याचिकाएं दायर की थीं.

लिंग्दोह का कहना था कि सीवीसी की नियुक्ति के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में विपक्ष की नेता भी थीं जिन्होंने नियुक्ति का विरोध किया था.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि थॉमस का नाम केरल के पामोलीन तेल आयात घोटाले की चार्जशीट में आ चुका है इसलिए उन्हें पूर्ण रुप से ईमानदार नहीं माना जा सकता.

इसके अलावा थॉमस कुछ समय पहले तक दूरसंचार मंत्रालय में थे और 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले में उनके शामिल होने के आरोप लगे हैं.

याचिका में कहा गया है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने विपक्ष की नेता के विरोध के बावजूद थॉमस को सीवीसी नियुक्त किया.

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