भाषा की गंगा-जमुनी

  • 7 दिसंबर 2010
राजस्थान
Image caption हर साल राजस्थान आने वाले लगभग 15 लाख विदेशी सैलानियों में सबसे ज़्यादा फ्रांसीसी होते हैं.

फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सरकोज़ी अपनी पत्नी कार्ला ब्रूनी के साथ भारत और फ़्रांस के बीच संबंधों की बुनियाद पुख़्ता करने भारत आए हैं.

ऐसे माहौल में राजस्थान के कर्नल पूरण सिंह का योगदान सहज याद आता है.

कर्नल सिंह राजस्थानी और फ्रेंच भाषा के बीच रिश्तों की ऐसी इमारत खड़ी करने में जुटे हैं जो बहुत दूर से और देर तक नज़र आएगी.

कर्नल सिंह ने 400 से ज़्यादा ऐसे शब्द ढूंढ निकाले हैं जो दोनों भाषाओं में समान हैं.

इनमें राजस्थान की तहज़ीब का हिस्सा माना जाने वाला सिरमौर यानी साफ़ा भी शामिल है. फ्रेंच भाषा में भी टोपी यानी हैट को ‘साफ़ा’ कहते हैं.

रिश्तों में कशिश

कर्नल सिंह खुद फ्रेंच ज़बान के विद्यार्थी हैं और फ्रांस में अपनी इसी खोज पर एक पर्चा भी पढ़ आए हैं.

कर्नल सिंह के अनुसार, ''अब तक मैं ऐसे 400 शब्द ढूंढ चुका हूँ. मुझे भरोसा है कि ये खोज बहुत आगे जाएगी और दोनों ज़बानों में परस्पर मिठास का ऐसा पुल खड़ा करेगी, जिस पर दोनों देशों के लोग हाथ में हाथ डालकर ज़माने का सफर करेंगे.''

देश, व्यक्ति और समूह कई बार रिश्तों में कशिश महसूस करते हैं, करीब आते हैं, मगर सतह पर अकसर कोई ऐसा निशान नहीं दिखता जो निकटता के कारणों को बयां करे.

क्या ये महज़ इत्तेफ़ाक है कि हर साल राजस्थान आने वाले लगभग 15 लाख विदेशी सैलानियों में सबसे ज़्यादा फ्रांसीसी होते हैं.

समानता

पर्यटन विशेषज्ञ संजय कौशिक कहते हैं, ''ये सही है कि हर साल कई लाख फ्रांसीसी राजस्थान आते हैं, क्योंकि दोनों देशों में गज़ब की समानता है. फ़्रांस के लोग कला प्रेमी और वीरता के उपासक हैं. राजस्थान के किले, महल, वास्तुशिल्प, रंग-बिरंगे परिधान, यहां की जीवनशैली और धरती की ख़ूबसूरती उन्हें बहुत भाती है. ये लोग यहां के आतिथ्य और आवभगत के कायल हैं.''

कर्नल सिंह लगातार फ्रेंच और राजस्थानी में समानता के तत्व खोजने में लगे हुए है.

वो कहते हैं, ''जब मैं स्कूली छात्र था, तब एक बार मैंने भेड़ के बच्चे के लिए राजस्थानी में प्रयुक्त शब्द को फ्रेंच भाषा से मिलाया. शब्द पढ़कर मैं चौंक गया. दोनों शब्द लगभग समान थे. फिर मेरी जिज्ञासा मुझे दूर तक ले गई. तब से इस खोज में जुटा हूं कि दोनों ज़बानों के अल्फाज़ किस तरह साथ-साथ सफ़र कर रहे हैं.''

कर्नल सिंह बताते हैं कि राजस्थान में छोटे बर्तन को ‘तासलो’ कहते हैं, फ्रेंच में ये 'तास' है. साबुन फ्रेंच में ‘सावोंन’ है. राजस्थानी में नाराज़गी के लिए 'रुसनो शब्द का इस्तेमाल किया जाता है तो फ्रेंच में ये रोंशोने है.

भाषा समूह

रीत राजस्थानी में भी रीत है और फ्रेंच में भी. गठरी को राजस्थानी में पोटली कहते हैं और आपको सुनकर ताज्जुब होगा कि फ्रेंच में ये पोटले है. राजस्थानी में कुत्ते को पुकारते हैं तो तू तू कहते हैं, फ़्रांस में कुते का नाम ही तू तू है.

मगर राजस्थानी शब्दों की ये पोटली कौन-कब फ़्रांस ले कर गया, ये जानना बड़ी उपलब्धि होगी.

प्रोफेसर आशा पांडेय पिछले दो दशकों से भी ज़्यादा समय से राजस्थान यूनिवर्सिटी में फ्रेंच पढ़ा रही हैं.

उन्हें अपने इस काम के लिए फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'लीजियो द ऑनर' मिल चुका है. वे कहती हैं, ''ये सही है कि दोनों ज़बानों में समानता है, क्योंकि दोनों ज़बानों का भाषा समूह इंडो-जर्मनिक है. ऐसा लगता है कि घुमन्तु जातियों के प्रवाह और प्रवास ने शब्दों को यहाँ से वहां पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई है. ''

प्रोफेसर पांडेय कई बार फ्रांस गई हैं और दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक अलग मिठास को महसूस करती हैं.

वो कहती हैं, ''मैं कई बार अपने विद्यार्थियों को फ्रांस ले गई हूं और लौटते वक़्त ऐसे जज़्बाती लम्हे देखे हैं कि रुलाई फूट पड़ती है. हमारी न सिर्फ ज़बान बल्कि जीवन मूल्य भी एक सामान हैं.''

गंगा-जमुनी

कर्नल सिंह ने जो खोजा है वो तो सतह पर दिखता है. मगर थोड़ी और गहनता से देखें तो ज़्यादा समानताएं सामने आती हैं.

फ़्रांस से भारत और फिर राजस्थान, शब्दों ने ये यात्रा कब की कोई नहीं जानता. कर्नल सिंह ने कुछ और शब्दों पर नज़र डाली तो पता लगा कि राजस्थानी में वाद्य यंत्र को बाजो कहते है. फ्रेंच में इसे ‘बांजो’ नाम दिया है.

फ्रांस के राष्ट्रपति का उपनाम सारकोज़ी है. राजस्थानी में किसी को विनम्र भाव से आगे खिसकने के लिए कहेंगे-सरको जी. मगर ये तुक बंदी होगी!

दुनिया एक नायाब गुलदस्ता है जिसमें अलग-अलग मज़हब, जात, नस्ल, चेहरे-मोहरे, ज़बान-बोली और लिबास हैं.

कुछ लोग इस गुलदस्ते में समाए फूलों में भेद और विभाजन ढूँढ़ते रहते हैं, तो कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इंसानी रिश्तों को बेहतर करने के लिए समानताएं ढूंढने में अपना जीवन बिता देते हैं.

फ्रेंच और राजस्थानी में निकटता की गंगा-जमुनी ढूंढना शायद ऐसा ही फ़लसफा है.

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