तेलंगाना मामले पर विधानसभा स्थगित

प्रदर्शनकारी छात्र
Image caption अलग राज्य की मांग को लेकर बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे थे.

तेलंगाना के छात्रों के विरुद्ध दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग ने आंध्र प्रदेश विधान सभा को हिलाकर रख दिया है.

गत एक वर्ष के दौरान तेलंगाना राज्य के आन्दोलन में भाग लेने वाले छात्रों के विरुद्ध दर्ज पुलिस केस वापस लेने में देरी पर नाराज़गी प्रकट करते हुए शुक्रवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति के विधायकों ने सदन में कोई करवाई नहीं चलने दी.

उनका कहना था कि केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने एक वर्ष पहले यह आश्वासन दिया था कि ये मामले ख़त्म कर दिए जाएँगे लेकिन अब तक सरकार ने कोई करवाई नहीं की.

विधान सभा के शीतकालीन अधिवेशन के पहले दिन करवाई शुरू होते ही टीआरएस के विधायकों ने गड़बड़ शुरू कर दी और सरकार से बयान देने की मांग की.

दूसरे विपक्षी दलों तेलुगु देशम, प्रजा राज्यम पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और बीजेपी ने भी इस मांग का समर्थन किया और कहा कि इन छात्रों का भविष्य ख़राब होने से बचाने के लिए सरकार उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामले वापस ले ले.

इस पर गृह मंत्री इन्द्र रेड्डी ने कहा की सरकार इस मामले का जायज़ा ले रही है और जल्द ही वो सदन में एक बयान देगी. लेकिन इस पर संतुष्ट न होकर टीआरएस के सदस्यों ने स्पीकर की कुर्सी के निकट पहुंच कर धरना दिया और नारे लगाए.

अलग रंग

इस बीच मामले ने एक दूसरा रंग ले लिया जबकि मजलिस इत्तेहादुल मुस्लमीन के नेता अकबरुद्दीन ओवैसी ने मांग की कि हैदराबाद में सांप्रदायिक गड़बड़ के सम्बन्ध में जिन मुस्लिम युवाओं के विरुद्ध मामले दर्ज किए गए उन्हें भी वापस लिया जाए.

एमईएम के सदस्यों ने यह कहते हुए अपना विरोध जारी रखा की सरकार को इस विषय में शुक्रवार को ही कोई घोषणा करना होगी.

मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी के लिए सत्ता की बाग़डोर हाथ में लेने के बाद यह पहला अधिवेशन है.

Image caption कुछ युवाओं पर पुलिस ने कई मामले थोप दिए है.

उन्होंने सदस्यों को यह आश्वासन देने की कोशिश की कि सरकार क़ानूनी विशेषज्ञों से सलाह मशवरे के बाद कोई फैसला करेगी और उसके लिए उसे कुछ समय चाहिए.

उन्होंने कहा कि अगर नियमों के अनुसार काम नहीं किया गया तो अदालत में सरकार को परेशानी उठानी पड़ेगी.

उन्होंने कहा कि मुस्लिम युवाओं के विरुद्ध दर्ज मामलों पर सोमवार को विधान सभा में चर्चा होगी. लेकिन इस के बाद भी जब गड़बड़ चलती रही, तो विधान सभा के उपाध्यक्ष डी मनोहर ने सदन की बैठक शनिवार तक के लिए स्थागित कर दी.

इसके बाद भी तेलंगाना राष्ट्र समिति के 11 और बीजेपी के एक सदस्य ने सदन में अपना धरना जारी रखा. टीआरएस नेता हरीश राव ने कहा कि वो रात भर यह धरना जारी रखेंगे क्योंकि इस मामले में सरकार के टालमटोल को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

उन्होंने आरोप लगाया कि तेलंगाना के लिए लड़ने वाले जिन छात्रों पर मामले दर्ज किए गए हैं, उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है और कुछ के ख़िलाफ़ तो 150 केस दर्ज किए गए हैं.

अधिकतर केसे ओस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों के ख़िलाफ़ हैं जो गत वर्ष नवम्बर से अलग तेलंगाना राज्य के आन्दोलन में सबसे आगे थे. उन में से कुछ पर बसें जलाने, तोड़ फोड़ और दंगा करने के मामले दर्ज किए गए हैं.

इसके अलावा आंध्र और रायलसीमा क्षेत्रों में उन छात्रों के विरुद्ध भी मामले हैं जिन्होंने तेलंगाना के विरुद्ध और संयुक्त आंध्र प्रदेश के पक्ष में आन्दोलन में हिस्सा लिया था. टीआरएस को छोड़ कर शेष तमाम दल सभी क्षेत्रों के छात्रों के विरुद्ध मामले वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

दिलचस्प बात यह है कि लोक सत्ता के विधायक और भूतपूर्व आईएस अधिकारी जयप्रकाश नारायण अकेले सदस्य थे जिन्होंने हिंसा करने वालों के विरुद्ध दर्ज मामले वापस लेने का विरोध किया और कहा कि यह कानून के ख़िलाफ़ होगा. उन्होंने कहा कि सदन को यह स्पष्ट संकेत देना चाहिए कि क़ानून के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा चाहे वो कोई भी करे और सरकार को किसी ब्लैकमेलिंग के आगे नहीं झुकना चाहिए.

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