मक्का मस्जिद विस्फोट:अभियोग पत्र दाख़िल

  • 14 दिसंबर 2010
मक्का मस्जिद विस्फोट (फ़ाइल फ़ोटो)

हैदराबाद की मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट के संबंध में सीबीआई ने अभियोग पत्र दाख़िल किया है.

चरमपंथी संगठन अभिनव भारत और आरएसएस से संबंध रखने वाले देवेंद्र गुप्ता और लोकेश शर्मा के विरुद्ध 80 पन्नों का यह अभियोग पत्र 15वें अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दाख़िल किया गया है.

इसमें गुप्ता और शर्मा को अभियुक्त नंबर तीन और चार बताते हुए उनपर हत्या, हत्या के प्रयास, भय फैलाने, दो समुदायों के बीच नफ़रत पैदा करने, विस्फ़ोटक पदार्थ रखने, और देश के विरूद्ध लड़ाई छेड़ने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

सीबीआई ने कहा है कि इस मामले के दो मुख्य अभियुक्त संदीप डांगे और रामचंद्र कल्सान्ग्र अभी लापता हैं, जबकि एक और मुख्य आरोपी असीमानंद से सीबीआई पूछताछ कर रही है.

एक और अभियुक्त और आरएसएस के कार्यकर्त्ता सुनील जोशी की 2007 के अंत में मध्य प्रदेश में अज्ञात व्यक्तियों ने हत्या कर दी थी.

सीबीआई ने अभियोग पत्र में कहा है कि असीमानंद ने दूसरे अभियुक्तों को यह कहकर हमले के लिए उकसाया था कि हमें बम का जवाब बम से देना है.

सीबीआई के वकील ने एक वक्तव्य में कहा कि अभियुक्तों ने यह अपराध इसलिए किया क्योंकि वो "जिहादी आतंकवादियों की गथिविधियों पर बहुत क्रोधित थे और उन्हें लगा था कि हिंदू मंदिरों और हिंदुओं पर हमले करने वाले आतंकवादी इस लिए बच निकल रहे हैं क्योंकि उन्हें स्थानीय मुसलमानों का सहयोग मिल रहा है."

सीबीआई का कहना है कि वह छानबीन पूरी होने के बाद एक और अभियोग पत्र दाख़िल करेगी.

जिन लोगों को इस मामले में अभियुक्त बनाया गया है, वही अजमेर शरीफ़ की दरगाह में विस्फोट के मामले में भी अभियुक्त हैं.

मामला

मक्का मस्जिद में यह विस्फोट 18 मई 2007 को शुक्रवार की नमाज़ के बाद हुआ था जिस में छह लोगों की मौत हुई थी और लगभाग 20 लोग घायल हुए थे.

उसके बाद जब भीड़ मस्जिद से बाहर निकल कर विरोध प्रदर्शन करने लगी तो पुलिस की फ़ायरिंग में नौ और लोगों की मौत हो गई थी.

पहले हैदराबाद पुलिस ने इस दृष्टिकोण से छान बीन शुरू की कि इसमें लश्करे तैबा या हरकतुल जिहाद-ए-इस्लामी जैसे संगठनों का हाथ है.

फिर अधिकारियों ने मीडिया के द्वारा यह प्रचार भी किया था कि इसके लिए शाहिद बिलाल नाम का एक हैदराबादी युवा ज़िम्मेदार है जो पाकिस्तान या बांग्लादेश में छिपा हुआ है.

इस विस्फोट की छानबीन के दौरान पुलिस ने 100 से ज़्यादा स्थानीय मुस्लिम युवाओं को पकड़ कर यातनाएं दीं और उनसे ज़बरदस्ती अपराध स्वीकार करवाने की कोशिश की.

26 युवाओं को अदालत में पेश किया गया लेकिन अदालत ने उन्हें बरी कर दिया.

संदेह

लेकिन मालेगांव के विस्फोट में कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा ठाकुर की गिरफ़्तारी के साथ ही यह संदेह बढ़ गया कि यह काम हिंदू चरमपंथी संगठनों का है.

Image caption विस्फोट से छह लोगों की मौत हुई थी और बाद में पुलिस फ़ायरिंग में भी नौ लोग मरे थे.

इस छानबीन में पहली बड़ी सफलता उस समय मिली जबकि राजस्थान पुलिस के आतंकवाद विरोधी दल ने आरएसएस के प्रचारक देवेंद्र गुप्ता और उसके एक दोस्त लोकेश शर्मा को गिरफ़्तार कर लिया.

उनसे पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि वो लोग मक्का मस्जिद के विस्फोट में भी लिप्त हैं.

हैदराबाद और अजमेर के विस्फोट में कई समानताएं थीं और दोनों ही में एक जैसे बम सेल फ़ोन द्वारा फोड़े गए थे.

बाद में इस में कई और लोगों के लिप्त होने की बात सामने आई जिनमें रामचंद्र कल्संग्र और संदीप डांगे के साथ-साथ असीमानंद भी शामिल हैं.

षडयंत्र

सीबीआई के अनुसार असीमानंद इन विस्फोटों का षडयंत्र रचने वालों में से थे.

लोकेश शर्मा ने मक्का मस्जिद में वो जगह चुनी जहाँ बम स्थापित किए जा सकते थे.

बाद में गुप्ता, संदीप और सुनील जोशी ने मस्जिद के आहाते में दो बम लगाए. उनमें से केवल एक ही बम फट सका जबकि दूसरा नहीं फटा.

फटने वाले बम से जो सेल फ़ोन सिम कार्ड मिला उसी से बाद में इस घटना के तार गुप्ता से जोड़े जा सके क्योंकि हैदराबाद और अजमेर शरीफ़ में उपयोग होने वाले सिम कार्ड गुप्ता ने ही झारखण्ड और पश्चिमी बंगाल से ख़रीदे थे.

सीबीआई ने सिकंदराबाद की उस लॉज का भी पता लगाया जहाँ गुप्ता और उस के साथी दो दिन ठहरे थे और जहाँ वो विस्फोट के बाद वापस लौट गए.

ये तीनों रेल मार्ग से हैदराबाद आए थे और रेलमार्ग से ही वहाँ से वापस लौटे थे.

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