बच्चों को बहलाता रहा माँ बाहर गई है

अनुपमा
Image caption अनुपमा और राजेश का प्रेम विवाह हुआ था

देहरादून में पत्नी की बेरहमी से हत्या करने वाले राजेश गुलाटी पर पुलिस ने धारा 302 के तहत मुक़दमा दर्ज करा दिया है. अभियुक्त की निशानदेही पर मसूरी के जंगलों से शव के कुछ टुकड़े भी बरामद हुए हैं.

इस समय सबकी ज़बान पर एक ही सवाल है. पत्नी का बेरहमी से क़त्ल करने के बाद कोई इतना सामान्य जीवन कैसे गुज़ार सकता है जबकि शव उसी घर में मौजूद हो.

पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर 38 साल के राजेश गुलाटी ने 17 अक्टूबर को दशहरे की रात अपनी पत्नी की हत्या कर दी. पुलिस के मुताबिक दोनों का किसी बात पर झगड़ा हुआ और राजेश ने अपनी 37 साल की पत्नी अनुपमा पर हाथ उठा दिया.

हैवानियत तारी थी

अनुपमा नीचे गिरी और उसके चेहरे पर चोट लगी. राजेश पर हैवानियत इस कदर हावी थी कि उसने अपनी पत्नी का तकिए से मुंह दबा दिया जब तक कि अनुपमा की जान नहीं चली गई.

इसके बाद राजेश अगले दिन बाज़ार गया और वहां से डीप फ्रीज़र ख़रीद लाया. उसने लोहा काटने की आरी भी खरीदी और मार्बल कटर भी. इसके बाद उसने लाश के टुकड़े टुकड़े किए और उन्हें पॉलीबैग में भर भरकर फ्रीज़र में डालता रहा.

बाद में धीरे-धीरे वह लाश के टुकड़े मसूरी के जगंलों में जाकर फेंकने लगा.

इस दौरान उसने साढ़े चार साल के अपने दो मासूम जुड़वां बच्चों को कानो कान खबर नहीं लगने दी कि उनकी मां क्यो नहीं दिख रही है. बच्चों को उसने ये बता रखा था कि उनकी मां दिल्ली गई है.

वो उन्हें किसी न किसी बहाने से समझाता बुझाता और स्कूल के लिए तैयार कर भेजता रहा. खाना भी वो खुद ही बनाता था. इस दौरान पडो़सियों को भी भनक नहीं लगी.

Image caption राजेश इस समय पुलिस हिरासत में है

बाहर सबके साथ उसका व्यवहार सामान्य और सहज था. पड़ोसियों के मुताबिक राजेश के भीतर इतनी भयानक क्रूरता भरी हुई हो सकती है इसका अंदाज़ा कभी नहीं लग पाया. अब सब सुन रहे हैं तो सबके पांवों तले ज़मीन खिसकी हुई जान पड़ रही है.

स्थानीय लोगों में आक्रोश भी है. रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी जगदीश चंद्र का कहना है, ''देहरादून को लगता है किसी की नज़र लग गई है. ऐसा कभी नहीं हुआ और अब देखो तो हर रोज़ कोई न कोई क्राइम हो रहा है.''

अनुपमा का परिवार दिल्ली में रहता है. मूल रूप से वो उड़ीसा की रहने वाली थी.

परिवार को अनुपमा के हालचाल मेल से पता चलते रहे जिन्हें 17 अक्टूबर के बाद से राजेश उसके नाम से भेज रहा था. उसे अपनी पत्नी की मेल आईडी और पासवर्ड की जानकारी थी.

देहरादून के एसएसपी जीएस मार्तोलिया ने बताया, ''फोन पर बात कराने के मामले में राजेश कुछ दिन तो टालमटोल करता रहा लेकिन फिर अनुपमा के भाई को शक हुआ और वो बहन से मिलने देहरादून चला आया. रविवार को वो उसके घर पहुंचा तो राजेश से बात करने के बाद उसका शक यकीन में बदलता गया और स्थानीय पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने पुलिस चौकी पहुंचे.''

वहां पुलिस ने राजेश को भी बुलवाया और उससे सच उगलवा लिया.

हैरान कर देने वाला बयान

फिर जो कहानी पता चली उसने तो पुलिस समेत सभी के रोंगटे खड़े कर दिए. किसी को यकीन ही नहीं हो रहा है कि आखिर कोई ऐसा भी कर सकता है.

पुलिस के आईजी गढ़वाल एम ए गणपति का कहना है, ''ऐसा हैवानियत कभी नहीं देखी. इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर की श्रेणी में रखकर जांच की जाएगी. इसमें अपराध विशेषज्ञ, फॉरैंसिक एक्सपर्ट और मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ की मदद ली जा रही है. ''

देहरादून में सबकी ज़बान पर ये हत्याकांड है. सबका यही सवाल है कि आखिर कत्ल के बाद अपने दो बच्चों के साथ आरोपी सामान्य और सहज ढंग से कैसे रहता था.

Image caption राजेश ने लाश को सुरक्षित रखने के लिए फ़्रीज़र ख़रीदा

राजेश ने ठंडे अंदाज़ में अपने अपराध के बारे में बताया, ''बीवी के साथ झगड़ा होता रहता था. वो पैसे मांगती रहती थी. पाकेट मनी मांगती थी. बच्चों की केयर ठीक से नहीं हो पा रही थी. मैं परेशान था. उस दिन हमारा झगड़ा हुआ और मैने उसे मारा तो वो नीचे गिर गई. उसके सिर से खून बहा तो मैने उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया और सिर तकिए से दबाया. वो मर गई. फिर मैने उसके टुकड़े किए. मुझे कुछ समझ नहीं आया. वो मर गई. मुझे जेल हो जाएगी. बच्चों का क्या होगा. ''

प्रेम विवाह

पुलिस को अनुपमा के परिजनों और राजेश से पूछताछ से जो मालूमात हासिल हुई है उसके मुताबिक दोनों का प्रेम विवाह था. राजेश कुछ साल अमरीका में भी रहा लेकिन वहां से नौकरी छोड़कर दिल्ली आ गया.

वह कुछ समय कोलकाता में भी रहा जहां बताया जा रहा है कि उसका किसी विवाहिता महिला से संपर्क भी हुआ. इस संपर्क को लेकर भी पति पत्नी में तनातनी बताई जाती थी. फ़िलहाल अभियुक्त के बच्चे उनके मामा की कस्टडी में दे दिए गए हैं.

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