स्पैक्ट्रम मामले में राडिया के घर सीबीआई का छापा

नीरा राडिया

सीबीआई ने 2जी स्पैक्ट्रम के कथित घोटाले के सिलसिले में कॉर्पोरेट लॉबिंग करने वाली नीरा राडिया के घर और दफ़्तर पर छापा मारा है और तलाशी की कार्रवाई चल रही है.

सीबीआई प्रवक्ता विनीता ठाकुर ने इस बात की पुष्टि की और बताया कि नीरा राडिया और भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के पूर्व चेयरमैन प्रदीप बैजल के घरों के अलावा तमिलनाडु में 27 स्थान पर छापे की कार्रवाई चल रही है.

सीबीआई प्रवक्ता का कहना था कि कुलमिलाकर 34 स्थानों पर छापे मारे गए हैं.

प्रदीप बैजल दूरसंचार क्षेत्र के नियम क़ानून निर्धारित करने वाली संस्था भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन हैं और रिटायर होने के बाद वो नीरा राडिया की एक कंपनी से संबंद्ध हो गए थे.

इसके पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि फ़ोन टैपिंग ज़रूरी है लेकिन इसका इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी थी कि कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर से फ़ोन टैपिंग मामले को देखने और एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेने को कहा गया है.

ग़ौरतलब है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वो उस शिकायत की प्रति अदालत में जमा करें जिसके आधार पर कॉर्पोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की बातचीत टेप करना शुरु किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों जीएस सिंघवी और एके गांगुली के एक पीठ ने कहा, "अटॉर्नी जनरल इस शिकायत की प्रति एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में अदालत में जमा करवाएँ."

लीक से हंगामा

नीरा राडिया की बातचीत के जो हिस्से लीक हुए हैं और मीडिया में प्रकाशित हुए हैं उसमें राजनीतिज्ञों, उद्योग जगत की कई प्रमुख हस्तियों और पत्रकारों से उनकी बातचीत शामिल है.

प्रकाशित विवरणों में से एक नीरा राडिया और टाटा उद्योग समूह के प्रमुख रतन टाटा के बीच हुई बातचीत भी है.

रतन टाटा ने इसके ख़िलाफ़ याचिका दायर करके कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को इस सामग्री के प्रकाशन पर रोक लगानी चाहिए क्योंकि इससे उनकी निजता यानी प्राइवेसी का हनन होता है.

इस याचिका का जवाब देते हुए पिछले हफ़्ते सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा था कि नीरा राडिया के ख़िलाफ़ वर्ष 2007 में ये शिकायत मिली थी कि उन्होंने नौ साल के अल्पकाल में 300 करोड़ रुपए की कंपनी खड़ी कर ली.

सरकार ने कहा था कि उन पर विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी की एजेंट होने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का भी शक था.

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