2015 तक भारत-चीन के बीच 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

वेन जियाबाओ और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रात्रिभोज पर
Image caption वेन जियाबाओ तीन दिवसीय भारत यात्रा पर दिल्ली में हैं

दिल्ली में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ की यात्रा के दूसरे दिन भारत और चीन ने दोनों देशों के बीच व्यापार को वर्ष 2015 तक 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है. इस समय दोनों देशों के बीच लगभग 49 अरब डॉलर का व्यापार होता है.

दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच इस समय दिल्ली के हैदराबाद हाउस में सामरिक और वाणिज्य मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक के बाद साझा बयान में बताया गया है कि हर वर्ष दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक पर सहमति बनी है. साथ ही दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच हॉट लाइन स्थापित होगी.

दिलचस्प है कि दोनों देशों ने एडन की खाड़ी में सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के अनुसार वाणिज्य गतिविधियों के लिए सहयोग करने पर सहमति जताई है.

दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में बैंकिंग, ग्रीन तकनीक, मीडिया एक्सचेंज, जल संसाधन, सतलुज नदी के बारे में छह समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं.

दिल्ली के हैदराबाद हाउस में बैंकिंग क्षेत्र में भारतीय रिज़र्व बैंक और चीन की बैंकिंग ऑथॉरिटी के बीच समझौता हुआ है ताकि व्यापारियों को सुविधा हो सके. ग्रीन तकनीक को बढ़ावा देने के लिए दोनों देश सहयोग करेंगे.

इसी के साथ जल संसाधन के क्षेत्र में दोनों देश सहयोग करेंगे. सतलुज नदी के बारे में भी दोनों पक्षों ने समझौते पर दस्तखत किए हैं.

इससे पहले सतलुज नदी में बाढ़ आने और हिमाचल प्रदेश के कई इलाक़ों में पानी भर जाने के लिए या फिर चीनी क्षेत्र से भारत में आने वाली इस नदी पर वहाँ बांध बनाए जाने के आरोप लगते रहे हैं, इसलिए ये समझौता महत्वपूर्ण है.

'सामरिक मुद्दों पर सर्वसम्मति'

इससे पहले गुरुवार को चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा कि उन्हें 'भरोसा है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से साथ बातचीत में वे दोनों देशों के बीच सामरिक मुद्दों पर सर्वसम्मति बनाने में सफल होंगे.'

गुरुवार को दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ये विचार व्यक्त किए.

चीन के प्रधानमंत्री वेन ने कहा - "भारत और चीन के बीच संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं. मेरी भारत यात्रा के समय भारत-चीन कूटनीतिक संबंधों के 60 साल पूरे हो रहे हैं. मेरा उनका लक्ष्य दोनों देशों के बीच सहयोग के साथ-साथ भारत और चीन के लोगों के बीच सहयोग बढ़ाना है ताकि ये सहयोग नए स्तर तक पहुँचे.'

सभी की नज़रें अब भारत-चीन रिश्तों पर वेन के भाषण पर टिकी हैं जो दोपहर में होगा.

इससे पहले प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ ने कहा कि 'भारत और चीन हमेशा के लिए दोस्त हैं और दोनों देशों के 2.5 अरब लोगों के सहयोग से एशिया को नई ऊँचाइयों तक ले जाया जा सकता है जिसका पूरे विश्व पर असर होगा.' ये विचार उन्होंने दिल्ली के स्कूली बच्चों के साथ बातचीत के दौरान व्यक्त किए.

'प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझीदार'

वेन जियाबाओ के साथ लगभग 400 लोगों का व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल आया है. भारत और चीन के बीच व्यापार 2004 के 13.5 अरब अमरीकी डॉलर से बढ़कर इस समय लगभग 50 अरब अमरीकी डॉलर हो गया है. भारत का सबसे ज़्यादा व्यापार भी चीन के साथ ही होता है. अगले साल ये आंकड़ा बढ़ कर 60 अरब डॉलर हो जाएगा. अब वर्ष 2015 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य रखा गया है.

वेन जियाबाओं ने बुधवार को दिल्ली में कहा था कि इस यात्रा के दौरान भारत-चीन के बीच 16 अरब डॉलर के व्यापारिक समझौते होंगे और भारत-चीन व्यापारिक सम्मेलन के दौरान ऐसा ही हुआ. इनमें से सबसे बड़ा समझोता शंघाई इक्ट्रिक कॉर्पोरेशन और रिलांयस इंडस्ट्रीस के बीच लगभग नौ अरब डॉलर का है.

बुधवार को दिल्ली में भारत-चीन व्यापार सहयोग सम्मेलन के दौरान वेन जियाबाओ ने कहा, "मीडिया में कुछ लोगों ने कहा है कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी हैं...मैं इस विचार से सहमत नहीं हूँ, दोनों अर्थव्यवस्थाएँ साझीदार हैं."

उन्होंने ये भी कहा - "मैं भारत दोस्ती और सहयोग बढ़ाने आया हूँ. पहले की उपलब्धियों को और पुख़्ता किया जाएगा और नई चुनौतियों से निपटा जाएगा."

भारत-चीन रिश्तों पर भाषण

लेकिन सभी की नज़र टिकी है दोपहर में चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओं के उस भाषण पर जिसमें वे भारत-चीन रिश्तों पर अपना नज़रिया रखेंगे.

दिल्ली के टैगोर इंटरनेशनल स्कूल में बच्चों से बात करते हुए वेन ने कहा था, "हमारे यहाँ आने के बाद, मेरा और मेरे सहयोगियों का बहुत गर्मजोशी से स्वागत हुआ है. मैं मानता हूँ कि हम ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि हम दोस्त हैं, सदा के लिए दोस्त हैं."

उनका ये भी कहना था कि 'चीन में छात्रों का मानना है कि लगभग 2.5 अरब लोगों वाले दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग से हम एशिया को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं जिसका पूरे विश्व पर असर होगा.'

गुरुवार को चीन और भारत के प्रधानमंत्रियों के बीच सामरिक मुद्दों और सीमा विवाद पर भी चर्चा होगी.

उधर चीन ने तिब्बत के मुद्दे पर काफ़ी संवेदनशील रुख़ अपनाया हुआ है और कुछ महीने पहले उसने तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश जाने पर आपत्ति जताई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत कश्मीर की अहमियत पर वही रुख़ अपना रहा है जो चीन ने तिब्बत और ताईवान पर अपनाया है.

दिल्ली में उनकी यात्रा के दौरान तिब्बती युवाओं ने प्रदर्शन किए हैं और जंतर-मंतर पर तीन दिवसीय धरना-प्रदर्शन हो रहा है.

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