भारत और रुस के बीच कई अहम समझौते

रूस के राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव के भारत दौरे के दौरान भारत और रूस के बीच 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं. इसमें असैनिक परमाणु सहयोग पर अहम समझौता शामिल है.

भारत और रुस ने एक नए लड़ाकू विमान के संयुक्त विकास के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता करीब तीस अरब डॉलर का है.इसके अलावा दोनों देशों के बीच कई समझौते हुए हैं जिसके तहत रुस दक्षिण भारत में दो परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों का निर्माण करेगा.

दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को बीस अरब डॉलर तक बढ़ाने का फैसला किया है.

मेदवेदेव मंगलवार से दो दिन के भारत दौरे पर आए हैं. उन्होंने सुबह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मुलाक़ात की.

मेदवेदेव ने मुलाक़ात ने बाद संयुक्त पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि अगर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का विस्तार होता है तो भारत स्थाई सदस्य बनने का हक़दार है. रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के साथ अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई है.

आतंकवाद के मुद्दे पर मेदवेदेव का कहना था, "आतंकवादियों को सज़ा मिलनी ही चाहिए. कोई भी आतंकवादियों को अपने यहाँ आम नागरिक की तरह जगह नहीं दे सकता और उन्हें सौंपना ही चाहिए. मैं जानता हूँ कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया जटिल होती है, इसके लिए क़ानूनी ढाँचे की ज़रूरत है. ऐसा ढाँचा तैयार होने के बाद आतंकवादियों को सौंप दिया जाना चाहिए ताकि उन्हें सज़ा मिल सके."

पत्रकार वार्ता में मेदवेदेव ने भारतीय फ़िल्मों की चर्चा भी की और कहा कि रूस में भारतीय फ़िल्में बड़े चाव से देखी जाती हैं.

वहीं अपने संबोधन में मनमोहन सिंह ने कहा कि रूस भारत का ऐसा दोस्त है जिसने हर अच्छे-बुरे समय में भारत का साथ दिया है. उन्होंने कहा कि भारत के बाक़ी देशों से बढ़ते संबंधों के बावजूद रूस के साथ रिश्ता आगे बढ़ता रहेगा.

समझौते

परमाणु क्षेत्र में सहयोग के अलावा दोनों देशों के बीच तेल और गैस क्षेत्र, अंतरिक्ष,विज्ञान और तकनीक और फ़ार्मा क्षेत्र में समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं. अवैध आप्रवासियों को रोकने और हाइड्रोकाबर्न सेक्टर में भी भारत और रूस के बीच सहमति पत्र बना है.

रूस की निर्वाचन एजेंसी ने भारतीय चुनाव आयोग के साथ निर्वाचन संबंधी एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

दोनों देशों के बीच ये सहमति भी बनी है कि 2015 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर किया जाएगा.

रूसी राष्ट्रपति भारत के साथ कारोबार और रिश्तों को बढ़ावा देने के मकसद से भारत आए हैं.

बदलते संबंध

रूस में बने हथियारों के लिए भारत पुराना बाज़ार रहा है लेकिन बीबीसी संवाददाता जॉनथन मार्कस का कहना है कि अब दोनों देशों के संबंध बदल रहे हैं.

भारत अब सिर्फ़ रूस से हथियार नहीं खरीदना चाहता बल्कि उनकी तकनीक भी सीखना चाहता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि शीत युद्ध के दौरान भारत और सोवियत संघ के क़रीबी रिश्ते रहे हैं और रूसी राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव चाहते हैं कि उनकी कंपनियां अन्य विदेशी कंपनियों से परमाणु और रक्षा सौदों में न पिछड़ जाएँ.

मंगलवार शाम को रूसी राष्ट्रपति लोक सभा में विपक्ष की नेता, कांग्रेस अध्यक्ष, उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति से मुलाक़ात करेंगे.

यात्रा के दौरान बुधवार को मेदवेदेव सुबह आगरा जाएँगे जिसके बाद वे मुंबई में बॉलीवुड से जुड़े लोगों से मिलेंगे और फ़िल्म सिटी देखने जाएंगे.

रूस में भारतीय फ़िल्में और टीवी सीरियल खासे लोकप्रिय हैं.वहाँ कुछ निजी संचालक नियमित रूप से बॉलीवुड फ़िल्में दिखाते हैं.

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