गूजरों पर कोर्ट ने याचिका खारिज की

गूजर
Image caption गूजर पिछले कुछ वर्षों से लगातार आरक्षण की मांग पर आंदोलनरत हैं.

राजस्थान में गूजरों को पाँच फ़ीसदी आरक्षण देने संबंधी याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि गूजरों के बारे में वो एक साल में आँकड़ें सौंपे.

इस पर गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा है कि वे कोर्ट के फ़ैसले का सम्मान करते हैं लेकिन उनकी लड़ाई सरकार के साथ है जो जारी रहेगी.

आरक्षण की मांग को लेकर गूजर कई वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं. हाल के कुछ दिनों में गूजरों ने फिर से अपना आंदोलन तेज़ कर दिया है और कई जगह रेल मार्ग अवरुद्ध कर रखा है.

गूजर जहाँ नौकरियों में आरक्षण चाहते हैं तो सरकार की मुश्किल ये रही है कि हाई कोर्ट ने आरक्षण पर रोक लगा रखी है. सरकार अगर गूजरों को पाँच फ़ीसदी आरक्षण देती है तो कुल आरक्षण 54 फ़ीसदी यानी 50 प्रतिशत से ज़्यादा हो जाता है.

गूजर आंदोलन

ये आंदोलन राजस्थान में पिछली भाजपा सरकार के दौरान शुरू हुआ जब गूजर वर्ष 2006 में करौली जिले में रेल लाइनों पर आ जमे और दिल्ली -मुंबई बाधित कर दिया.

कुछ गूजर नेताओ के मुताबिक, बीजेपी ने कथित तौकर पर गूजर बिरादरी के लिए आरक्षण का वादा किया था मगर भाजपा ने इससे इंकार किया और कहा ये उसके चुनावी घोषणा पत्र में नहीं था.

इसके बाद 2007 से लेकर 2008 के बीच गूजरों ने कई बार प्रदर्शन किए और इस दौरान हुई हिंसा में कोई 70 लोग मारे गए.

अंतत राजस्थान सरकार ने गूजर और कुछ अन्य जातियों के आरक्षण के लिए विधयेक विधान सभा से पारित करवाया.लेकिन ये विधेयक राजभवन में रुक गया क्योंकि तत्कालीन राज्यपाल एसके सिंह ने इस पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया था.

उसके बाद से गूजर लगातार आरक्षण की माँग करते रहे हैं लेकिन सरकार हाई कोर्ट के फ़ैसले का इतंज़ार रही थी.

संबंधित समाचार