परेश बरुआ का बेटा लापता

  • 23 दिसंबर 2010
उल्फा विद्रोही
Image caption उल्फा कई सालों से भारत सरकार के ख़िलाफ़ लड़ाई छेड़े हुए है.

भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम में सक्रिय शीर्ष अलगाववादी नेता परेश बरुआ ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को बांग्लादेश में अगवा कर लिया गया है.

यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम की सैन्य शाखा के प्रमुख परेश बरुआ ने गुरुवार को एक ईमेल संदेश में कहा है कि जिन लोगों ने उनके बेटे को अगवा किया है वो लोग उन पर दबाव डाल रहे हैं कि वो भारत सरकार के साथ वार्ता प्रक्रिया में हिस्सा लें.

बरुआ ने अपने बयान में कहा, ‘‘इस तरह के दबाव का मुझ पर असर नहीं पड़ेगा. असम की आज़ादी के लिए हज़ारों युवाओं और महिलाओं ने बलिदान दिया है. अगर शहीदों की उस सूची में मेरे बेटे का नाम भी आता है तो कोई बात नहीं. मैं इसके लिए तैयार हूं.’’

बरुआ ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी है कि उनके बेटे को कब कहां और कैसे कथित रुप से किडनैप किया गया है और उन्होंने साफ़ साफ किसी पर आरोप भी नहीं लगाया है.

हालांकि उन्होंने मोटे तौर पर संकेत दिया है कि इसके पीछे भारत सरकार का षडयंत्र हो सकता है. इस बयान में कुछ वरिष्ठ उल्फा नेताओं पर हमला ज़रुर किया गया है और कहा गया है कि ये नेता तमाम तरह की बातें फैला रहे हैं और भारत के साथ वार्ताएं करना चाहते हैं.

परेश बरुआ लगातार भारत सरकार के साथ बातचीत का विरोध करते रहे हैं और कहते रहे हैं कि जब तक ‘असम की संप्रभुता का मसला’ एजेंडा में नहीं होगा वो बातचीत नहीं करेंगे.

भारत सरकार ने उनकी इस मांग को ठुकरा दिया है.

वर्ष 2009 में बांग्लादेश की अवामी लीग के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सक्रिय पचास से अधिक विद्रोहियों को गिरफ्तार कर भारत को सौंपा है.

हालांकि परेश बरुआ इस धरपकड़ से बच कर दक्षिण पूर्व एशिया के किसी देश में छुप जाने में सफल हुए लेकिन उनकी पत्नी और बच्चा अभी भी बांग्लादेश में ही हैं.

भारत के गुप्तचर विभाग ने बरुआ के बेटे की किडनैपिंग के मामले में बरुआ के आरोपों को आधारहीन करार देते हुए हुए उसे उल्फा की अंदरुनी लड़ाई करार दिया है.

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