'प्रधानमंत्री को समिति के समक्ष पेश होने की ज़रूरत नहीं'

प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब मुखर्जी पहले संसद का विशेष सत्र बुलाने की पेशकश कर चुके हैं

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री संसद के प्रति जवाबदेह हैं और उन्हें किसी संसदीय समिति के सामने पेश होने की ज़रूरत नहीं है.

भारत में संचार क्षेत्र के 2जी स्पेक्ट्रम मामले में संसद की शीतकालीन सत्र चल नहीं पाया क्योंकि विपक्ष संयुक्त संसदीय जाँच की माँग पर अड़ा हुआ है. दूसरी ओर सरकार का कहना है कि पहले ही लोक लेखा समिति मामले की जाँच कर रही है और प्रधानमंत्री ने समिति के समक्ष ख़ुद पेश होने की पेशकश भी की है.

दिल्ली में रविवार को मुखर्जी ने कहा, "संयुक्त संसदीय समिति क्या है? क्या ये आसमान से आती है? मुझे जेपीसी गठित करने का कोई तर्क समझ में नहीं आता. उन्हें (विपक्ष) को संसद में आना चाहिए और सामान्य स्थिति कायम करनी चाहिए. उन्हें सहयोग देना चाहिए, हम उन्हें सुनने के लिए तैयार हैं."

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुखर्जी ने कहा, "संसदीय प्रणाली में मूल सिद्धांत ये होता है कि जिसे बहुमत मिलता है वह शासन चलाता है. जिन्हें बहुमत नहीं मिलता वो सरकार की नीतियों का विरोध कर सकते हैं लेकिन वह संसद में होना चाहिए."

उनका कहना था कि एक विचित्र स्थिति पैदा हो गई है क्योंकि जैसे ही संसद का काम शुरु होता है, वैसे ही एक गुट नारेबाज़ी करना लगता है और सदन की कार्यवाही चल नहीं पाती है.

इससे पहले मुखर्जी ने 2जी मामले पर बहस करने के लिए संसद का एक विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव रखा है.

लेकिन विपक्ष ने इसे ठुकरा दिया था. विपक्ष, विशेष तौर पर भाजपा का कहना था कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन या तो संयुक्त संसदीय समिति का गठन करें या फिर पद से इस्तीफ़ा दें.

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