अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ अनशन

  • 27 दिसंबर 2010
तेलंगाना के लिए प्रदर्शन (फ़ाइल तस्वीर)

आंध्र प्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व के लिए परेशानियाँ और चुनौतियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं.

अब पार्टी के 11 लोकसभा सदस्यों और एक राज्य सभा सदस्य ने इस मांग के साथ आमरण अनशन शुरू कर दिया है कि सरकार तेलंगाना राज्य के आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए तमाम मामले वापस ले ले.

उन्होंने यह मांग भी की है कि तेलंगाना में गड़बड़ी की आशंका के मद्देनज़र जो अर्धसैनिक बलों को तैनात किया जा रहा है, उन्हें वापस बुला लिया जाए क्योंकि इससे लोगों में भय उत्पन्न हो रहा है. इस आमरण अनशन में जो सांसद शामिल हैं, उनमें पूनम प्रभाकर, जी सुखिंदर रेड्डी, जी विवेकानंद, एम जगन्नाथम, सर्वे सत्यनरायाण और राज्य सभा के सदस्य केशव राव शामिल हैं. पहले यह सांसद विधानसभा के सामने तेलंगाना शहीद समारक पर अनशन पर बैठे थे लेकिन जब पुलिस ने उस की अनुमति नहीं दी तो वे न्यू एमएलए क्वार्टर्स पर उसी जगह बैठे जहाँ गत सप्ताह विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू ने किसानों की समस्याओं को लेकर आमरण अनशन किया था.

क़दम

केशव राव ने कहा कि सांसदों को यह क़दम इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद छात्रों के विरुद्ध मामले हटाने का वादा पूरा न होने पर वे निसहाय महसूस करने लगे थे.

उन्होंने कहा, "इस ग़लती और असफलता के लिए हम अपने आप को दंडित करने यह अनशन कर रहे हैं." एक और सांसद पूनम प्रभकर ने कहा कि वो कोई ग़लत मांग नहीं कर रहे हैं क्योंकि पिछले साल नौ दिसंबर को ही गृह मंत्री पी चिदंबरम ने वादा किया था कि तमाम मामले वापस ले लिए जाएंगे और सरकार को इसी वादे को पूरा करने पर मजबूर करने के लिए हम अनशन पर बैठे हैं. उन्होंने कहा कि अगर ये वादा पूरा नहीं किया गया तो कांग्रेस को नुक़सान पहुँचेगा. केशव राव ने कहा कि अर्ध सैनिक बलों को हैदराबाद और पूरे तेलंगाना में तैनात करने का क़दम दुर्भाग्यपूर्ण है.

उन्होंने पूछा कि ऐसा करने का क्या कारण है जबकी पिछले एक वर्ष से चल रहे तेलंगाना आंदोलन में कोई हिंसा नहीं हुई न किसी पर हमला हुआ, न गोली चली और न ही कर्फ़्यू लगा.

उन्होंने इस बात की निंदा कि उस्मानिया विश्वविद्यालय में सैंकड़ों अर्ध सैनिक जवानों को तैनात किया जा रहा है जिससे वहां तनाव बढ़ गया है.

मांग

उन्होंने मांग की कि इन जवानों को तुरंत हटाया जाए. केशव राव ने कहा, "यह अलोकतांत्रिक है. ऐसा तो दंतेवाड़ा में नहीं हो रहा है."

सरकार ने यह कहते हुए केंद्र से अतरिक्त बल मांगे हैं कि 31 दिसंबर को श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट पेश होने के बाद तेलंगाना में गड़बड़ हो सकती है. पूनम प्रभाकर ने कहा कि उनका संघर्ष केवल मामले उठाने और अर्ध सैनिक बलों को वापस बुलाने के लिए नहीं बल्कि अलग तेलंगाना राज्य के लिए है.

उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि गत वर्ष दिसंबर में जो वादा किया गया था उसे पूरा किया जाए और तेलंगाना राज्य बनाने के लिए संसद के अगले अधिवेशन में बिल लाया जाए." सांसदों का यह क़दम इसलिए भी असाधारण है कि आम तौर पर वो पार्टी के नेतृत्व की अनुमति के बिना इतना बड़ा क़दम नहीं उठाते. लेकिन ऐसा लगता है कि तेलंगाना की जनता की बढ़ती हुई नाराज़गी और क्षेत्र की राजनीति में हाशिए पर आ जाने के डर ने उन्हें यह क़दम उठाने पर मजबूर किया है. इन सांसदों के इस क़दम का कई दूसरे संगठनों ने स्वागत किया है. तेलंगाना के आंदोलन की सबसे बड़ी पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेता ई राजिंदर ने कहा कि कम से कम अब इन सांसदों को तेलंगाना की जनता की भावनाओं का ख़्याल आया है.

उन्होंने कहा कि अगर तेलंगान में कांग्रेस के तमाम सांसद और विधायक धमकी दे दें कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे त्यागपत्र दे देंगे तो केंद्र कल तेलंगाना राज्य की स्थापना पर मजबूर हो जाएगा. जिन दूसरे बड़े नेताओं ने इन सांसदों का समर्थन किया है उनमें तेलंगन संयुक्त संघर्ष समिति के मुख्य प्रोफ़ेसर कोदंडा राम, लोक गायक ग़द्दार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जी वेंकटस्वामी शामिल है.

इनके अलावा तेलंगाना के डॉक्टरों, इंजीनियरों, वकीलों की संयुक्त समितियों ने भी उनका समर्थन किया है.

अपील

मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डी श्रीनिवास ने सांसदों से अनशन वापस लेने की अपील की है लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया है.

Image caption पिछले साल तेलंगाना के लिए काफ़ी प्रदर्शन हुए थे

सरकार की ओर से बोलते हुए मंत्री जना रेड्डी ने कहा की सरकार पहले ही 560 मामले वापस ले चुकी है और आज उसने 135 मामले वापस लेने का फ़ैसला किया है और बाक़ी मामले वापस लेने पर विचार जारी है. लेकिन सांसद इतनी जल्द सरकार पर से दबाव हटाना नहीं चाहते.

दूसरी और तेलंगाना के सरकारी अधिकारियों की यूनियन ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार अलग राज्य की स्थापना के लिए क़दम नहीं उठती तो वे 11 जनवरी से काम बंद कर देंगे.

इधर श्रीकृष्ण समिति के सचिव विनोद कुमार दुग्गल ने कहा है कि समिति की रिपोर्ट 31 दिसंबर को केंद्र सरकार को दे दी जाएगी.

कांग्रेस के प्रवक्ता शकील अहमद ने दिल्ली में कहा है कि कांग्रेस छोटे राज्यों के विरुद्ध नहीं है लेकिन वो तेलंगाना के मुद्दे पर राजनैतिक सहमति का इंतज़ार कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेगी.

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