पीएसी के समक्ष पेश होंगे कैग

ए राजा
Image caption टू जी मामले में ही दूरसंचार मंत्री ए राजा को इस्ती़फ़ा देना पड़ा है और मामले की सीबीआई जांच चल रही है.

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के मामले में संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांगों के बीच सोमवार को नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षतावाली लोक लेखा समिति (पीएसी) के समक्ष पेश होंगे.

उल्लेखनीय है कि कैग की रिपोर्ट में ही कहा गया था कि टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए घोटाले के कारण सरकारी खजाने को एक लाख सत्तर हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है.

पीएसी कैग रिपोर्ट की जांच कर रहा है और कैग की अध्यक्षता भारतीय जनता पार्टी के नेता मुरली मनोहर जोशी के हाथ में है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय इस मामले में पीएसी के समक्ष पेश होंगे और अपनी बात रखेंगे.

2 जी स्पेक्ट्रम के मामले में दूरसंचार मंत्री ए राजा को इस्तीफ़ा देना पडा है और विपक्ष पूरे मामले की जेपीसी जांच की मांग कर रहा है और पीएसी की जांच को मानने से इंकार करता रहा है. हालांकि पीएसी के अध्यक्ष बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी हैं और उनका कहना है कि वो अपना काम करेंगे.

Image caption भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी पीएसी के अध्यक्ष हैं

यह मुद्दा इतना तूल पकड़ चुका है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कहा है कि वो विपक्ष की जेपीसी के गठन की मांग नहीं मान सकते लेकिन पीएसी के समक्ष पेश होने में उन्हें कोई परेशानी नहीं है.

विपक्ष का आरोप है कि प्रधानमंत्री को टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए घोटाले के बारे में पहले से जानकारी थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने ए राजा के ख़िलाफ कार्रवाई करने में बहुत देर की.

2 जी स्पेक्ट्रम मामले में पिछले कुछ हफ्तों से कांग्रेस और बीजेपी एक दूसरे पर आरोप लगाती रही है. अगर पीएसी ने अपनी कार्रवाई जारी रखी तो जेपीसी की मांग कर रही बीजेपी को झटका लगेगा क्योंकि पीएसी की जांच उन्हीं की पार्टी के नेता कर रहे हैं.

कुछ अख़बारों ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि पीएसी स्पेक्ट्रम आवंटन की जांच वर्ष 2001 से करना चाहती है.

संसद में गतिरोध के दौरान कांग्रेस ने भी कहा था कि स्पेक्ट्रम आवंटन के मामले की जांच 2001 से ही होनी चाहिए.

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