गूजरों से दूसरे दौर की बातचीत

  • 27 दिसंबर 2010
पटरी पर बैठे गूजर आंदोलनकारी

राजस्थान में आरक्षण की मांग कर रहे गूजर नेताओं से रविवार को पहले दौर की बातचीत हुई है.

राजस्थान सरकार की ओर से ऊर्जा मंत्री जितेंद्र सिंह गूजरों की मांग पर भरतपुर ज़िले में उस स्थान पर गए, जहाँ गूजर रेल पटरियों पर धरना दिए बैठे है.

उनका कहना है कि बातचीत में गूजर नेताओं आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की गई.

ऊर्जा मंत्री स्वयं गूजर समुदाय से है. उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा कि सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीर है.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा सरकार को थोडा समय दे ताकि पुख्ता क़ानूनी उपाय किए जा सके.

दूसरी गृह मंत्री शांति धारीवाल भी पहले दौर की बातचीत से संतुष्ट नज़र आए और उनका कहना था कि बातचीत ठीक रही और लोगों को तकलीफ़ न हो और कोई रास्ता निकल आए, ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं.

नरमी के संकेत

इधर गूजर आंदोलनकारियों के रुख़ में थोड़ी नर्मी देखने को मिली है और उन्होंने भीलवाड़ा-अजमेर रास्ते से अवरोध हटा दिए हैं.

ग़ौरतलब है कि गूजर प्रदर्शनकारियों ने मुंबई-दिल्ली रेल मार्ग अवरुद्ध कर रखा है.

पिछले सात दिनों से अपनी बिरादरी के लिए आरक्षण की मांग को लेकर वे आंदोलन कर रहे है.

लेकिन गूजर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा, "हमारी बिरादरी के लोग तब तक नहीं उठेंगे जब तक हमारी मांगे नहीं मानी जाएँगी."

गूजर नेताओं और सरकार के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी.

इससे पहले शनिवार को राजस्थान सरकार ने तीन अधिकारियों नगर विकास आयुक्त जीएस संधू, शिक्षा सचिव अशोक संपतराम और निरंजन आर्य को गूजर नेताओं से बातचीत के लिए भेजा था.

गूजर नेताओं ने उन्हें बातचीत के लिए दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर आमंत्रित किया था. लेकिन अधिकारियों का कहना था कि बातचीत पटरी पर नहीं हो सकती.

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