गूजर आंदोलन से पर्यटन उद्योग प्रभावित

गूजर आंदोलन

राजस्थान में आरक्षण आंदोलन की वजह से सड़कें और रेलमार्ग बाधित है. इससे पर्यटन उद्योग के सामने संकट खड़ा हो गया है.

बड़ी तादाद में सैलानियों ने अपने यात्रा रद्द की है. कुछ यात्री सड़कों पर निकले तो उन्हें बहुत कड़वे अनुभव् से गुज़रना पड़ा. सरकार ने ने भी इस पर चिंता व्यक्त की है. व्यापर उद्योग जगत ने भी करोड़ों रुपये के नुक़सान की इत्तिला दी है.

किले महलों, आतिथ्य और मनभावन संगीत से रूबरू होने सैलानी जब राजस्थान में दाख़िल हुए तो राजमार्गो पर उन्हें बेकाबू भीड़ और नारों का कोलाहल मिला.

इटली की तानिया ने आगरा में ताजमहल देखा और फिर उसी मनोभाव से जयपुर का हवामहल देखने राजमार्ग पर निकलीं जो आगरा को जयपुर से जोड़ता है. मगर ये राह आसान नहीं थी.

सड़को पर अवरोध थे या फिर हंगामा. इसी माहौल में तानिया जयपुर पहुँच कर बोलीं, "इस यात्रा में बड़ा समय लगा, चार घंटे बर्बाद हो गए, हम राह बदलकर बदलकर जयपुर पहुंचे,शाम ढली और अँधेरा हुआ तो हमें बड़ा भय लगा".

राज्य की पर्यटन मंत्री बीना काक ने बीबीसी से कहा, "ये पर्यटन को बड़ा झटका लगा है. जयपुर में ही कोई तीस फ़ीसदी तक पर्यटन कारोबार को नुकसान पहुंचा है. पहियों पर राजमहल जैसी दो गाड़ियो के मार्ग में थोड़ा बदलाव कर चलाया गया है. जयपुर,सवाई माधोपुर और पूर्वी राजस्थान में ज्यादा नुकसान हुआ है. हम उम्मीद करते है जल्द ही माहौल ठीक होगा और पर्यटन उद्योग पटरी पर लौट आएगा".

राज्य में हर साल कोई पंद्रह लाख सैलानी आते है. यह अर्थव्यस्था का अहम हिस्सा है. जयपुर के एक प्रमुख पर्यटन कारोबारी कुलदीप सिंह कहते है कि इससे कारोबार को खासी क्षति पहुंची है.

उनका कहना है, 'मुझे लगता है कि कोई चालीस फ़ीसदी सैलानियो ने अपनी बुकिंग रद्द करा ली है. कोई भी सैलानी ऐसे माहौल में क्यों आना चाहेगा. मुझे सरकार के रुख़ पर अफ़सोस है. वो हाथ पर हाथ धरे बैठे है. ये इस कारोबार का सबसे अहम समय था".

अमरीका से आई सारा कहती है कि उनके गाइड और ड्राइवर बहुत होशियार थे. आगरा से जयुपर के बीच वे रास्ता बदलते रहे और किसी तरह जयपुर पहुंचे.

सारा कहती हैं, ''इसमें कोई दिककत नहीं हुई. बल्कि हमें ग्रामीण भारत की झांकी देकने को मिली. हाँ यात्रा में थोड़ा में बदलाव करना पड़ा. इसमें कोई खास परेशानी नहीं हुई".

ये जाते हुए साल की विदाई और आने वाले वर्ष के स्वागत का मौक़ा है. ऐसे में बड़ी तादाद में सैलानी राजस्थान का रुख कर रहे थे और जश्न की तैयारी में थे. मगर उनकी तैयारियाँ धरी रह गईं. गुर्जर आरक्षण के कारण रास्ते बंद है. सैलानियों के माथे पर ग़ुस्से की सलवटें हैं तो पर्यटन उद्योग के भाल पर मायूसी का भाव.

पर्यटन उद्योग के जानकर संजय कौशिक कहते हैं कि ये ऐसा नुक़सान है जो आगे भी राजस्थान की छवि को प्रभावित करेगा.

उनका कहना है, ''पिछले कई साल बाद बड़ी संख्या में देशी और विदेशी सैलानी राजस्थान आने वाले थे. ये साल का आखिरी दौर था, इसमें होटल और सब कुछ आरक्षित था. अब हर घंटे सैलानियो के यात्रा रद्द करने की जानकारी मिल रही है. सबसे ज्यादा प्रभाव पर्यटन के सुनहरे त्रिकोण में आने वाले आगरा-जयपुर पर पड़ा है".

इन हालात पर फ़ेडरेशन ऑफ़ ट्रेड ऐंड इंडस्ट्री के सचिव प्रेम बियानी कहते है, "हर रोज तीस करोड़ का नुक़सान आँका गया है.ये बढ़ रहा है.इस आन्दोलन ने ट्रेड और इंडस्ट्री की कमर तोड़ दी है ".

राज्य खाद्य पदार्थ व्यापर संघ के बाबूलाल गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि पिछले दस दिन से लगभग पचास मंडियो में कारोबार ठप्प पड़ा है और दो लाख मज़दूर प्रभावित हुए हैं.

राजस्थान की सड़के और राजमार्ग पर गुज़रते काफ़िलों से एक संगीतमय ध्वनि निकलती थी. सड़कों के लिए उतेजित भीड़ और शोला बयानी हाल के वर्षो का अनुभव था. फिर भी भीड़ के उस पार हर शाम क़िले महलों में दिए टिमटिमाते हैं और आवाज देकर बुलाते हैं 'पधारो म्हारे देश'.

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