आरूषि मामला: सीबीआई ने केस बंद किया

  • 30 दिसंबर 2010
आरुषि
Image caption आरुषि की हत्या का आरोप सबसे पहले उसके पिता राजेश तलवार पर लगा था.

सीबीआई ने आरुषि और हेमराज हत्याकांड में तहकीकात बंद कर इस मामले में अपनी आखिरी रिपोर्ट दाखिल कर दी है.

इसका मतलब ये है कि सीबीआई आरुषि और हेमराज के हत्यारे का पता नहीं लगा पाई.

सीबीआई की प्रवक्ता विनीता ठाकुर के मुताबिक आरुषि और हेमराज हत्याकांड में सबूतों के नाकाफी होने की वजह से केस को बंद करना पड़ा.

सीबीआई की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अदालत को इस केस में की गई तहकीकात और सबूतों के बारे में पूरी जानकारी दी गई है.

अब अदालत को यह तय करना है कि सीबीआई इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करे. अपनी ओर से सीबीआई यह केस बंद कर चुकी है.

सबूतों की कमी

सीबीआई के इस फैसले की खबर मीडिया में आने के बाद, आरुषि के मां-बाप ने पत्रकारों से बातचीत की.

आरुषि के पिता राजेश तलवार ने कहा कि ये साफ है कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई जांच में खामियों की वजह से ही सीबीआई ऐसी स्थिति में फंस गई जहां उसके पास पर्याप्त सबूत नहीं थे.

राजेश तलवार ने कहा, "अगर कोई ऐसा करने के बाद भी आज़ाद घूम सकता है, तो ये देश रहने लायक नहीं है."

आरुषि की मां नूपुर तलवार ने कहा कि मां-बाप के नाते वो टूट गए हैं.

नूपुर ने कहा, "मैं अपनी बेटी के हत्यारों को सज़ा दिलाए बगैर शांति से नहीं बैठ सकती. इसके लिए जो भी किया जा सकता है मैं करने कौ तैयार हूं."

मई 2008 में राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में 14 वर्षीय लड़की आरुषि तलवार और उसके घर में काम करने वाले नौकर हेमराज की आरुषि के घर में हत्या कर दी गई थी.

अनसुलझी गुत्थी

आरुषि की हत्या का आरोप सबसे पहले उसके पिता राजेश तलवार पर लगा था और हत्या के एक हफ्ते बाद ही मामले की तहकीकात कर रही उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर गाज़ियाबाद की डासना जेल भेज दिया था.

जुलाई में केस की जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद, सीबीआई ने सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा कर दिया था.

इसके बाद सीबीआई ने तलवार दम्पति के कम्पाउंडर कृष्णा और नौकर राजकुमार को मुख्य अभियुक्त बताते हुए हिरासत में लिया.

कृष्णा पर नार्को अनैलिसिस टेस्ट और 'लाई-डिटेक्टर' टेस्ट भी करवाया गया था.

ये दोनों टेस्ट चिकित्सकों की मौजूदगी में होते हैं और माना जाता है कि इनके दौरान आदमी सच उगल देता है.

यदि वह झूठ बोले तो उसके शरीर से झूठ बोलने के संकेत मिल जाते हैं.

लेकिन 3 महीने में भी आरोप पत्र ना दाखिल कर पाने की वजह से सीबीआई ने कृष्णा और राजकुमार को भी छोड़ दिया था.

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