गूजरों ने दिल्ली, आगरा के रेल रास्ते खोले

  • 29 दिसंबर 2010
गूजर महासभा - दिल्ली में

राजस्थान में आरक्षण की मांग कर रहे गूजर नेताओं नें बुधवार को जयपुर-दिल्ली और जयपुर-आगरा के रेलमार्ग खोल दिए हैं. लेकिन दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग पर और कई ज़िलों में अब भी प्रदर्शन जारी हैं.

बुधवार को दिल्ली में भी लगभग 150-200 गूजरों ने विरोध प्रदर्शन किया है.

अब सभी की नज़रें टिकी हैं प्रशासन और गूजर नेताओं के बीच दूसरे चरण की बातचीत पर. इससे पहले एक चरण की बातचीत हो चुकी है जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला था.

गूजर आंदोलन से पर्यटन उद्योग प्रभावित

बीबीसी संवाददाता नारायण बारेठ के अनुसार राजस्थान के सचिव स्तर के अधिकारी जीएस संधू ने बताया है कि चाहे बुधवार को गूजर नेताओं ने बातचीत के लिए दो बार हाँ भरी और दो बार ना कही, फिर भी स्पष्ट नहीं है कि गूजर बातचीत करेंगे या नहीं. हालाँकि बातचीत दोबारा शुरु करने के प्रयास जारी हैं.

पर्यटकों को कुछ राहत

पिछले लगभग दस दिन से गूजर सरकारी नौकरियों में आरक्षण की माँग करते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं और राजस्थान के कई हिस्सों से होने वाला रेल यातायात ठप्प है. इसके कारण छुट्टियों के दिनों में अनेक पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा है.

जयपुर के पुलिस महानिरीक्षक राजीव दासोत ने बीबीसी संवाददाता को बताया, "प्रदर्शन कर रहे गूजर जयपुर-दिल्ली और जयपुर-आगरा रेलमार्गों से हट गए हैं. इन्हें समझाया गया है और प्रशासन के साथ बातचीत के लिए प्रोत्साहित किया गया है. इन मार्गों से लगभग 40 ट्रेनें रोज़ाना गुज़रती हैं."

लेकिन दो रेलमार्गों का खुलना पर्यटकों के लिए ज़रूर राहत की बात है.

गूजरों के नेता डॉक्टर रूप सिंह का कहना है कि सरकार कोई ठोस प्रस्ताव नहीं रख रही है और आंदोलन जारी रहेगा.

दिल्ली में प्रदर्शन

बीबीसी संवाददाता पवन नारा के अनुसार गूजर आंदोलन के समर्थन में अखिल भारतीय गूजर महासभा के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन हुआ हालांकि इसमें शामिल लोगों की संख्या काफ़ी सीमित थी.

इस प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का पुतला फ़ूका गया.

इस मंच से दावा किया गया कि राजस्थान के गूजरों की आरक्षण की माँग जायज़ है और उनकी इस माँग के साथ भारत भर के गूजर खड़े हुए हैं.

दिलचस्प है कि गूजरों के प्रदर्शन में जंतर-मंतर पहुँचे थे वो मँहगी कारों में सवार थे, जिनमें से कुछ कारें तो आयातित विदेशी कारें थी.

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