छात्रों के ख़िलाफ़ मामले वापस होंगे

Image caption तेलंगाना के पक्ष और विपक्ष में छात्रों ने कई बार विरोध प्रदर्शन किए हैं

आंध्र प्रदेश सरकार ने वो तमाम 1665 मामले वापस लेने का फ़ैसला किया है जो पिछले एक वर्ष के दौरान अलग तेलंगाना राज्य के पक्ष और विरोध में आंदोलनों के दौरान दर्ज किये गए थे.

दो दिन से आमरण अनशन पर बैठे दस कांग्रेसी सांसदों के दबाव के आगे झुकते हुए सरकार ने ये फ़ैसला किया. इसकी घोषणा के तुरंत बाद सांसदों ने अपनी अनिश्चितकाल की भूख हड़ताल ख़त्म कर दी.

मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने तेलंगाना क्षेत्र के मंत्रियों और दूसरे नेताओं से सलाह मशवरे के बाद मामले वापस लेने का क़दम उठाया.

हालाँकि मुख्यमंत्री इस पर तैयार नहीं थे और उनका कहना था कि तमाम मामले वापस लेने से क़ानूनी आपत्तियाँ उठ सकती हैं. लेकिन तेलंगाना के मंत्रियों ने कहा कि जब समस्या आएगी तब उससे निबट लिया जाएगा.

दरअसल सरकार पर दबाव बढ़ गया था कि सांसदों के साथ कांग्रेस के विधायक भी भूख हड़ताल में शामिल हो जाएँगे.

आंदोलन

गृह मंत्री सबिता इन्द्र रेड्डी ने कहा कि सरकार ने राज्य में शांति बनाए रखने के लिए और छात्रों के भविष्य को बचाने के लिए यह फ़ैसला किया.

उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में 1665 मामले दर्ज किए गए थे. यह मामले तेलंगाना, आंध्र और रायलसीमा तीनों क्षेत्रों में दर्ज थे.

सांसदों ने धमकी दी थी कि जब तक सरकार सभी मामले बिना शर्त वापस नहीं लेगी वो अपना आमरण अनशन जारी रखेंगे. इनमें नौ लोक सभा के और एक राज्य सभा के सदस्य थे.

राज्य सभा सदस्य केशव राव ने फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा है, “अगर छात्र तेलंगाना के लिए लड़ने के लिए सड़कों पर आए थे तो उसके लिए राजनेता ही ज़िम्मेवार थे क्योंकि उन्होंने ही छात्रों को आन्दोलन करने के लिए कहा था और तेलंगाना राज्य देने का वादा किया था.”

केशव राव ने इन आरोपों का खंडन किया कि अनशन एक ड्रामा था जो कांग्रेस आला कमान के इशारे पर रचा गया था ताकि मामले वापस लेने का श्रेय कांग्रेस पार्टी को ही मिले.

राजनीति तेज़

इधर इस आमरण अनशन द्वारा जहाँ इन सांसदों ने ये इशारा दिया है कि वो तेलंगाना राज्य के आन्दोलन में अब और भी ज़्यादा सक्रिय भूमिका निभाएँगे वहीं इसके कारण तमाम तेलंगानावादी शक्तिओं को निकट आने का अवसर मिल गया है.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के चन्द्रशेखर ने, जो तेलंगाना के कांग्रेसी नेताओं पर हमले का कोई अवसर नहीं छोड़ते, भूख हड़ताल कैंप जाकर सांसदों के समर्थन की घोषणा की.

उन्होंने इस बात पर ख़ुशी जताई कि पहली बार कांग्रेस सांसदों ने धमकी दी है कि अगर संसद के बजट अधिवेशन में तेलंगाना राज्य का बिल प्रस्तुत नहीं किया गया तो वो त्यागपत्र दे देंगे.

राव ने कहा की अगर सभी दल और नेता मिलकर लड़ते हैं तो केंद्र के पास तेलंगाना राज्य देने के सिवा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा.

लेकिन आँध्र सरकार ने कांग्रेस सांसदों की यह मांग अभी नहीं मानी है कि अर्ध सैनिक बलों को तेलंगाना से हटाया जाए. सरकार ने 31 दिसंबर के बाद गड़बड़ की आशंका को देखते हुए इन बलों को तैनात किया है.

श्रीकृष्णा समिति 31 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट सरकार को पेश करने वाली है और इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा की केंद्र सरकार क्या कार्रवाई करेगी.

वैसे लगभग सभी दलों के तेलंगाना के नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उन्हें तेलंगाना राज्य की स्थापना के सिवा कोई दूसरी बात स्वीकार्य नहीं होगी और वो उसके बाद पूरे तेलंगाना में चक्का जाम कर देंगे.

जहाँ मामले वापस लेने के फ़ैसले से तेलंगाना के लोग और छात्र खुश हैं वहीं आंध्र और रायलसीमा के छात्रों ने इसकी निंदा की है और कहा है कि यह एक असंवैधानिक कदम है.

उन्होंने धमकी दी है कि अगर श्रीकृष्णा समिति तेलंगाना के पक्ष में रिपोर्ट देती है या केंद्र सरकार तेलंगाना के पक्ष में फ़ैसला करती है तो आंध्र और रायलसीमा के सभी सांसदों और विधायकों को त्यागपत्र देना पड़ेगा

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