सोनिया की तुलना महात्मा गांधी से

सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह
Image caption सोनिया गांधी ने अपने स्थान पर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का फ़ैसला किया था

कांग्रेस ने अपने 125 वर्षों का इतिहास लिखते हुए वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी की तुलना महात्मा गांधी से की है.

हाल ही में कांग्रेस से सवा सौ साल पूरे होने पर जारी किताब 'कांग्रेस एंड द मेकिंग ऑफ़ द इंडियन नेशन' में कहा गया है कि प्रधानमंत्री का पद स्वीकार न करने का त्याग महात्मा गांधी के त्याग की तरह से याद किया जाता है.

इस किताब में कांग्रेस में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या को महात्मा गांधी की तरह ही देश के लिए बलिदान बताया गया है.

कांग्रेस का कहना है कि इस किताब को कई इतिहासकारों ने मिलकर तैयार किया है और इसे पार्टी की सहमति से प्रकाशित किया गया है.

इस विषय में अपनी राय दीजिए

इसके मुख्य संपादक प्रणब मुखर्जी हैं और संयोजक आनंद शर्मा हैं. ये दोनों ही नेता यूपीए सरकार के वरिष्ठ मंत्री हैं.

त्याग की तुलना

दो खंडों में प्रकाशित इस किताब के पहले खंड के पृष्ठ 156 पर 'सोनिया गांधी का यादगार त्याग' शीर्षक के अंतर्गत प्रकाशित सामग्री में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने के सोनिया गांधी के फ़ैसले का ज़िक्र किया गया है.

इसमें 18 मई, 2004 को कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में सोनिया गांधी के संबोधन का ज़िक्र किया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री बनना कभी उनका लक्ष्य नहीं रहा, उन्हें सत्ता ने कभी आकर्षित नहीं किया और कोई पद पाना कभी उनका लक्ष्य नहीं रहा.

उल्लेखनीय है कि 15 मई को सोनिया गांधी को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया था और अगले दिन यानी 16 मई को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए ने भी उन्हें नेता चुना और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी.

लेकिन इसके दो दिन बाद उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा देते हुए मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने की घोषणा की थी.

प्रधानमंत्री पद त्यागने के सोनिया गांधी के फ़ैसले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई थी.

कांग्रेस ने अपनी किताब में कहा है, "उनके इस त्याग की व्यापक सराहना हुई और इसकी वजह से उनका क़द पार्टी में और लोगों के बीच बढ़ गया."

हाल ही में लगातार चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष चुनी गईं सोनिया गांधी के बारे में कांग्रेस का कहना है कि व्यक्तिगत सत्ता के त्याग और सामाजिक आदर्शों को हासिल करने का ऐसा उदाहरण आज़ादी के बाद से देखने को नहीं मिलता.

किताब में कहा गया है, "लोगों को सोनिया गांधी के इस सत्ता त्याग को देखकर महात्मा की याद आई."

इसी किताब के पृष्ठ 135 में राजीव गांधी की हत्या का ज़िक्र करते हुए कहा गया है, "महात्मा गांधी और अपनी माँ की तरह ही राजीव ने भी देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया."

हालांकि इसी में आगे कहा गया है कि श्रीलंका में जातीय संघर्ष को सुलझाने के उनके प्रयासों की वजह से ही तमिल छापामारों के संगठन एलटीटीई ने उनसे रंजिश पाल ली थी.

इसी किताब में कांग्रेस ने यह भी संदेह व्यक्त किया है कि राजीव गांधी की हत्या में एलटीटीई का ही हाथ था.

संबंधित समाचार