सीबीआई आरुषि मामले की जाँच करे: मोइली

आरुषि
Image caption आरुषि हत्याकांड में उसके पिता को भी गिरफ़्तार किया गया था

केंद्रीय क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक से मुलाक़ात की है और कहा है कि वे आरुषि हत्याकांड मामले की जाँच करें.

बुधवार को सीबीआई ने अदालत से कहा था कि वह आरुषि हत्याकांड की जाँच बंद कर रही है. उसका कहना था कि किसी के भी ख़िलाफ़ ठोस सबूतों के अभाव में वे जाँच बंद कर रहे हैं.

इसके बाद लोगों ने सीबीआई के फ़ैसले को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर की थी. आरुषि के परिवार वालों ने तो कहा था कि वे इस मामले में क़ानूनी क़दम उठाएंगे.

उल्लेखनीय है कि 14 वर्षीय स्कूली छात्रा आरूषि मई, 2008 में अपने कमरे में मृत पाई गई थी. उसकी गला रेत कर हत्या की गई थी. इस हत्या के लिए पहले घरेलू नौकर हेमराज पर शक किया जा रहा था लेकिन कुछ घंटों बाद उसका भी शव घर की छत पर मिल गया था.

'गंभीरता से लें'

लोगों की नाराज़गी के बाद क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली ने सीबीआई के निदेशक अमर प्रताप सिंह को बुलवाया था.

सीबीआई निदेशक के साथ उनकी दस मिनट तक चर्चा हुई.

इसके बाद वीरप्पा मोइली ने कहा, "यह तो स्पष्ट है कि किसी ने आरुषि की क्रूरता और कायरता पूर्वक हत्या की है. मैंने सीबीआई के निदेशक से कहा है कि वे इसे गंभीरता से लें."

उन्होंने एक टीवी चैनल से हुई बातचीत में कहा, "सीबीआई ने हमेशा सटीक काम किया है. यह सवाल नहीं है कि सीबीआई ने ठीक तरह से काम किया या नहीं, ये बहस का विषय भी नहीं है...मैं चाहता हूँ की सीबीआई इस मामले की जाँच करे."

बुधवार को सीबीआई ने गाज़ियाबाद की अदालत से कहा था कि उनके पास किसी के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं है.

सीबीआई ने कहा था कि न तो वह हत्या के मक़सद का पता लगा सकी है और न उसे हत्या में प्रयुक्त हथियार मिला है.

उल्लेखनीय है कि पहले इस मामले की जाँच नोएडा की पुलिस कर रही थी और उस पर आरोप लगा कि उसने जाँच में लापरवाही बरती और सबूत नष्ट कर दिए.

लोगों की नाराज़गी बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने इस दोहरे हत्याकांड की जाँच सीबीआई को सौंप दी थी.

इस मामले में आरुषि के पिता राजेश तलवार को गिरफ़्तार किया गया था. राजेश तलवार और उनकी पत्नी नुपुर दोनों की लाइ टिटेक्टर यानी झूठ बोलने वाली मशीन पर पूछताछ की थी और ब्रेन मैपिंग भी की गई थी. लेकिन कोई सुराग नहीं मिल सका.

जुलाई, 2008 में सबूतों के अभाव में राजेश तलवार को रिहा कर दिया गया था.

सीबीआई ने तीन घरेलू नौकरों को भी गिरफ़्तार किया था. उनसे भी सीबीआई को कुछ हासिल न हो सका और सितंबर, 2008 में उन्हें भी रिहा कर दिया गया था.

संबंधित समाचार