‘ज़िंदगी भर के लिए मुजरिम क़रार’

राजेश तलवार
Image caption राजेश तलवार पुलिस हिरासत में भी रहे हैं

आरुषि की माँ नूपुर तलवार ने कहा है कि सीबीआई ने उन्हें ज़िंदगी भर के लिए मुजरिम क़रार दे दिया है.

नुपुर तलवार ने कहा, “सीबीआई का काम तो आ­­­­रुषि के हत्यारों को पकड़ना था, ना कि एक आसान रास्ता अपनाकर केस के बंद कर दें. सीबीआई ने हमें ज़िंदगी भर के लिए मुजरिम क़रार दे दिया है और सीबीआई के इस रुख़ से हमें धक्का लगा है.”

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने केस को बंद करते हुए जो रिपोर्ट अदालत को सौंपी है, उसमें एक बार फिर राजेश तलवार और नूपुर तलवार की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया गया था.

नूपुर तलवार ने कहा कि वो चुप नहीं बैठेंगी और अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए संघर्ष करती रहेंगी.

नूपुर तलवार जब मीडिया के सामने आई तब उनके साथ उनके पति राजेश तलवार और वकील रेबेका जॉन भी मौजूद थीं.

सीबीआई के रुख से स्तब्ध राजेश तलवार ने कहा “जब मैं देश में उपलब्ध सभी जाँचों से गुज़र चुका हूं, तो अब मुझे अपने आप को निर्दोष साबित करने के लिए क्या करना होगा. अपने को निर्दोष साबित करने के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूँ.”

तलवार परिवार की वकील रेबेका जॉन ने मीडिया के रुख़ पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मीडिया शब्दों का चुनाव ठीक तरह से करे.

रेबेका जॉन ने कहा, “सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कुछ परिस्थितियों के बारे में बताया है. और जैसा प्रेस में आया है कि डॉ तलवार के खिलाफ़ सीबीआई को कोई सबूत नहीं मिले है. इसलिए मीडिया ये ना कहे कि सीबीआई ने उन्हें दोषी ठहराया है.”

दावा

सीबीआई ने केस बंद करते हुए 30 पन्ने की अपनी रिपोर्ट ग़ाज़ियाबाद की एक अदालत में पेश की थी.

इस रिपोर्ट में सीबीआई ने आरोप लगाया है कि राजेश और नूपुर तलवार ने 16 मई 2008 की सुबह उत्तर प्रदेश की पुलिस से रेलवे स्टेशन जाकर अपने नौकर हेमराज को पकड़ने को कहा और इस बीच आरुषि का कमरा धो दिया.

15 मई की रात आरुषि की हत्या उनके नोएडा स्थित घर पर कर दी गई थी. अगले दिन हेमराज का शव घर की छत से मिला था.

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा है कि आरुषि के सिर पर जो चोट के घाव थे, उसका आकार राजेश तलवार के गोल्फ स्टिक से मिलता-जुलता था.

सीबीआई का कहना है कि ये गोल्फ़ स्टिक तलवार दंपत्ति ने गहन पूछताछ के बाद एक साल बाद सौंपी थी.

वर्ष 2008 मई में आरुषि की हत्या हुई थी.

हालाँकि नूपुर तलवार का दावा है कि उन्होंने ख़ुद ही वो गोल्फ स्टिक सौंपी थी, सीबीआई ने उनसे इसके लिए कुछ नहीं कहा था.

केस बंद करने की अपनी रिपोर्ट के कारण आलोचनाओं के घेरे में आई सीबीआई ने कहा है कि आरुषि के माता-पिता का व्यवहार संदेहास्पद रहा है.

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में तलवार परिवार के तीनों नौकरों कृष्णा, राजकुमार और विजय मंडल के बारे में कहा है कि तीनों बेकसूर पाए गए.

सीबीआई ने आरुषि हत्याकांड की जाँच जून 2008 में शुरू की थी.

अपनी रिपोर्ट में सीबीआई ने यह भी कहा है कि हत्या के दिन रात साढ़े 10 बजे तक सब कुछ सामान्य था, जो वीडियो कैमरे से ली गई कुछ तस्वीरों से पता चलता है. सीबीआई का कहना है कि आरुषि के पिता मध्यरात्रि तक इंटरनेट से उलझे थे.

सीबीआई ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया है कि ये असंभव लगता है कि हत्यारे ने हत्या के बाद शव को चादर में लपेटा हो.

रिपोर्ट में इसका भी ज़िक्र है कि घर में किसी ने जबरन प्रवेश नहीं किया था. आरुषि का कमरा किसी होटल के कमरे की तरह था, जिसे अंदर से या बाहर किसी चाबी से खोला जा सकता है.

सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आरुषि के कमरे की चाबी उनकी माँ के पास थी.

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