एक अपराधी की मौत

  • 4 जनवरी 2011
हैदराबाद
Image caption सूरी और परिताला रविंद्रन की लड़ाई पर बॉलीवुड में फ़िल्म भी बन चुकी है.

रायलसीमा क्षेत्र में उपद्रवी दलों की आपसी दुश्मनी और खून खराबे ने आज एक बार फिर उस समय अपना सर उठाया जब अनंतपुर ज़िले के एक खतरनाक गुट के नेता जी सूर्यनारयण रेड्डी उर्फ़ सूरी की अज्ञात बन्दूकधारियों ने हैदराबाद में सोमवार की शाम हत्या कर दी.

सूरी का नाम हाल ही में उस समय चर्चा में आया था जब मशहूर फिल्म निर्माता रामगोपाल वर्मा ने सूरी और एक अन्य उपद्रवी नेता परिताला रविन्द्र की दुश्मनी पर एक फिल्म "रक्त चरित्र" बनाई थी.

हैदराबाद पुलिस आयुक्त अब्दुल कय्यूम खान ने बताया कि सूरी पर उस समय निकट से गोली चलाईं गई जब वो अपने एक वकील से मिलने के बाद जुबली हिल्स स्थित अपने घर लौट रहे थे.

उन्हें पीछे से सर और पीठ में पांच गोलियां लगीं और वो अपनी स्कोडा कार में ही ढेर हो गए.

उन के ड्राइवर ने उन्हें निकट के अपोलो अस्पताल पहुंचाया जहाँ चार घंटे बाद उन की मृत्यु हो गई.

सूरी अपने प्रतिरोधी और तेलुगु देसम के विधायक परिताला रविन्द्र की हत्या के केस में मुख्या संदिग्ध थे.

इससे पहले उन्हें 1996 में इसी जुबली हिल्स इलाके में परिताला रविन्द्र को मारने के लिए एक कार बम विस्फोट के मामले में उम्र क़ैद हुई थी. इस हमले में रविन्द्र तो बच गए थे लेकिन 26 अन्य लोगों की मौत हो गई थी.

सूरी को गत वर्ष उस समय रिहा कर दिया गया था जब सरकार ने कई दूसरे बंदियों के साथ उन की सजा में भी कमी कर दी थी.

इस पर राज्य की कांग्रेस सरकार की काफी कड़ी आलोचना हुई थी की वो राजनैतिक कारणों से यह कदम उठा रही है.

जब से सूरी रिहा हुए थे तब ही से यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि उनकी हिंसात्मक गतिविधियां दुबारा शुरू हो सकती हैं.

अभी हाल ही में यह आरोप लगे थे कि उन्होंने विजयवाड़ा में लाखों रूपए लेकर विवाद निबटाना शुरू कर दिया है.

पुलिस को अनुमान है कि उनकी हत्या का सम्बन्ध किसी ऐसे ही मामले से है.

परिताला और सूर्यनारायण रेड्डी के परिवारों के बीच काफी लम्बे समय से गहरी दुश्मनी चली आ रही थी और दोनों ही परिवार और उनके गुट अनंतपुर ज़िले पर अपना प्रभुत्व कायम करने की कोशिश कर रहे थे.

इस लड़ाई ने उस समय एक राजनैतिक रंग ले लिया जब नक्सलवादी रहे परिताला ने राजनीति में आने का फैसला किया और तेलुगु देसम के अध्यक्ष एनटी रामाराव के प्रोत्साहन के साथ वो पहले विधायक चुने गए और 1994 में मंत्री भी बन गए.

यह दुशमनी और भी गहरा गई जब परिताला के गुट ने सूरी के परिवार को टीवी बम विस्फोट में मार डाला. समझा जाता है कि इसी का बदला लेने के लिए सूरी ने परिताला रविन्द्र को मारने कार के लिए कार बम विस्फोट किया था.

जिस समय सूरी जेल में थे उनके कई समर्थकों को परिताला गुट ने मार दिया था.

समझा जाता है कि उसी का बदला लेने के लिए सूरी ने परिताला रविन्द्र की हत्या करवा दी थी.

इस मामले का एक मुख्य अभियुक्त श्रीनिवास रेड्डी बाद में जेल में मारा गया.

इन्हीं दो परिवारों की दुश्मनी और उनके गुटों के खून खराबे पर राम गोपाल वर्मा ने हिंसा से भरी फिल्म रक्त चरित्र बनाई थी जिसे दो भागों में दो महीने पहले ही रिलीज़ किया गया था.

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