तेलंगाना रिपोर्ट से पहले तनाव

हैदराबाद (फ़ाइल फ़ोटो)
Image caption आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में इससे पहले भी इस मुद्दे पर तनाव रह चुका है (फ़ाइल फ़ोटो)

पृथक राज्य तेलंगाना के बारे में श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट को लेकर गृहमंत्री ने गुरूवार को दिल्ली में तेलंगाना क्षेत्र के सांसदों की एक बैठक बुलाई है.

तीन बड़े दलों के इस बैठक में शामिल होने से इंकार के बाद बुधवार को गृहमंत्री ने सबसे प्रमुख पार्टी तेलंगाना राष्ट्र समिति टीआरएस को फिर एक न्योता भेजा लेकिन पार्टी अपने फैसले पर टिकी हुई है.

इस बीच कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी ने क्षेत्रीय इकाई के कांग्रेसी सांसदों से दिल्ली में बैठक की और उनसे कहा कि वो इस मामले पर अपनी किसी भी प्रतिक्रिया के ज़रिए केंद्र के लिए शर्मनाक स्थितियां पैदा न करें.

पृथक राज्य तेलंगाना के बारे में श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट गुरूवार को सार्वजनिक होनी है. पाँच सदस्यों वाली जस्टिस श्रीकृष्ण समिति ने 31 दिसंबर को गृहमंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस इस समय आंध्रप्रदेश में बड़े संकट से गुज़र रही है. कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और राज्य स्तर पर हो रही इस उथल-पुथल का असर उसकी राज्य इकाई पर पड़ेगा.

आंध्र प्रदेश और विशेष तौर पर तेलंगाना क्षेत्र में तनाव है और वहाँ सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है.

रिपोर्ट के ब्यौरे को सार्वजनिक करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम ने दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की एक बैठक बुलाई है हालांकि तीन बड़े दलों ने बैठक में हिस्सा लेने से मना कर दिया है.

तनाव और सुरक्षा

अलग राज्य तेलंगाना की माँग करने वाली टीआरएस ने ये कहते हुए बैठक में आने से मना कर दिया है कि केंद्र ने प्रत्येक दल से दो-दो प्रतिनिधियों को बैठक में आने का निमंत्रण देकर ग़लती की है क्योंकि इससे बैठक में केवल टकराव वाले विचार व्यक्त किए जाएँगे.

भारतीय जनता पार्टी ने भी ये कहते हुए बैठक से अलग रहने की घोषणा की है कि तेलंगाना राज्य के गठन का फ़ैसला श्रीकृष्ण समिति नहीं कर सकती बल्कि इस बारे में कोई फ़ैसला करना केंद्र की ज़िम्मेदारी है.

तेलुगू देशम पार्टी ने भी ये सोचकर बैठक से दूर रहने का फ़ैसला किया है कि किसी

एक पक्ष का साथ लेने से दूसरे पक्ष के लोग पार्टी से नाराज़ हो सकते हैं.

कांग्रेस में मतभेद

रिपोर्ट के सामने आने से पहले ही राजनीतिक दलों के अंदरूनी मतभेद सामने आ रहे हैं जिससे तेलंगाना संकट के शीघ्र समाधान को लेकर संदेह की स्थिति बन गई है.

Image caption टीआरएस अध्यक्ष चंद्रशेखर राव ने पहले ही केंद्र सरकार का निमंत्रण ठुकरा दिया है

कांग्रेस के बारे में टीआरएस अध्यक्ष चंद्रशेखर राव का ये अनुमान सही प्रतीत हो रहा है कि बैठक में जानेवाले कांग्रेस के दोनों प्रतिनिधि क्षेत्रीय आधार पर बँट जाएँगे.

बैठक में जानेवाले आंध्र क्षेत्र के कांग्रेसी सांसद कावरी सांबा शिवराव ने कहा,"मेरा ये पक्का विश्वास है कि किसी राज्य के लिए बँट जाना आसान नहीं है, मेरा विश्वास है कि केंद्र सरकार इस बारे में उचित फ़ैसला करेगी.

वहीं तेलंगाना क्षेत्र से बैठक के लिए जानेवाले कांग्रेसी विधायक कैप्टन उत्तम कुमार रेड्डी ने माँग की है कि केंद्र को अलग राज्य की माँग को मान लेना चाहिए.

उन्होंने कहा,"तेलंगाना के अधिकतर लोग अलग राज्य की माँग कर रहे हैं और लोकतंत्र में बहुमत का सम्मान होना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि समिति की रिपोर्ट में यही बात होगी".

फ़ैसला

बैठक में जानेवाले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और कांग्रेसी नेता किरण कुमार रेड्डी ने पार्टी के भीतर इस तरह के मतभेद स्वाभाविक हैं.

उन्होंने कहा,"जब कोई एक क्षेत्र के लोग अपने क्षेत्र के संबंध में किसी एक तरह की महत्वाकांक्षा रखते हैं तो ये स्वाभाविक है कि उनके प्रतिनिधि इस तरह की इच्छा को प्रकट करते हैं".

वैसे गुरूवार की बैठक से तेलंगाना के बारे में कोई स्पष्ट फ़ैसला निकलने की उम्मीद कम है लेकिन कांग्रेस में तेलंगाना क्षेत्र के अपने सांसदों की धमकी को लेकर चिंता अवश्य है जिन्होंने रिपोर्ट के तेलंगाना विरोधी होने पर इस्तीफ़ा देने की धमकी दी हुई है.

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