'तेलंगाना से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं'

  • 6 जनवरी 2011
चंद्रशेखर राव
Image caption चंद्रशेखर राव टीआरएस के अध्यक्ष हैं.

दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर गठित श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने कड़ी टिप्पणी की है और विरोध प्रकट किया है.

तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के तेलंगाना क्षेत्र के नेताओं ने श्रीकृष्णा समिति की रिपोर्ट पर निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा कि उन्हें पृथक तेलंगाना राज्य के गठन के अलावा कोई विकल्प मंजूर नहीं है.

टीआरएस के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव ने कहा है कि उन्हें तेलंगाना से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं है, जिसकी राजधानी हैदराबाद होनी चाहिए.

टीआरएस के महासचिव और चंद्रशेखर राव के बेटे केटी राव ने कहा, "इस समस्या का एकमात्र व्यावहारिक हल अलग तेलंगाना राज्य का गठन है जो 10 ज़िलों को मिलाकर बनाया जाए और हैदराबाद को उसकी राजधानी बनाया जाए."

उन्होंने कहा, "समिति के ज़रिए पेश किया गया अन्य कोई भी सुझाव तेलंगाना के लोगों को क़बूल नही होगा. केंद्र सरकार को लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए अपने वायदे के अनुरूप अलग तेलंगाना राज्य के गठन के लिए फ़ौरन क़दम उठाना चाहिए."

तेलंगाना क्षेत्र के तेलुगू देशम पार्टी के नेताओं ने भी श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट को नकार दिया है. उन्होंने भी कहा है कि वहां के लोगों को पृथक तेलंगाना राज्य से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं है.

टीडीपी के नेता और तेलंगाना फ़ोरम के समन्वयक एन जनार्दन रेड्डी ने कहा, "हम उम्मीद कर रहे थे कि समिति तेलंगाना राज्य के गठन के लिए सीधा रास्ता सुझाएगी लेकिन उसने विभिन्न तरह के सुझाव देकर क्षेत्र के लोगों का अपमान किया है."

पूर्व मंत्री ने कहा, "मैं कांग्रेस को ख़बरदार करता हूं कि वह लोगों की भावनाओं के साथ न खेले और संसद के अगले सत्र में विधेयक लाकर तेलंगाना का गठन करे."

बहरहाल, गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आंध्र प्रदेश की राजनीतिक पार्टियों से अनुरोध किया है कि वह श्रीकृष्ण रिपोर्ट में शामिल सुझावों को खुले दिमाग़ के साथ पढ़ें.

उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट के ज़रिए इस बहस में काफ़ी जानकारी मिलेगी और काफ़ी परिपक्व बहस होगी.

आंदोलन की धमकी

तेलंगाना राष्ट्र समिति के महासचिव तारका रामराव ने कहा है कि तेलंगाना के लोग उस समय तक आंदोलन चलाएंगे जब तक केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना के लिए संसद में विधेयक पेश नहीं कर देती.

उन्होंने कहा, ''श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट से हमारा कोई लेना-देना नहीं है और अब हमारा सारा ध्यान आंदोलन पर केंद्रित रहेगा.''

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर कोदंडा राम का कहना है, ''अब केवल आंदोलन का रास्ता बचा हुआ है लेकिन यह आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा.''

Image caption आंध्र प्रदेश से अलग राज्य तेलंगाना की मांग काफ़ी पुरानी है.

तेलंगना संयुक्त संघर्ष समिति ने हैदराबाद में एक महाधरने का आयोजन किया है जिसमें तमाम संगठनों के नेता भाग ले रहे हैं.

तेलंगाना के सरकारी कर्मचारियों की यूनियन के अध्यक्ष स्वामी गौड़ ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी अपना काम रोक देंगे और असहयोग के ज़रिए काम-काज ठप कर दिया जाएगा. उनका कहना है कि प्रशासन को भी निलंबित कर दिया जाएगा.

इस बीच तेलंगाना आंदोलन का गढ़ माने जाने वाला उस्मानिया विश्वविद्यालय में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है.

बुधवार रात कुछ अज्ञात व्यक्तिओं ने विश्वविद्यालय परिसर में एक बस जला दी. दो बसों के शीशे तोड़ डाले जिसके बाद वहां सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

तेलंगाना क्षेत्र के अन्य मुख्य केंद्रों वारंगल, निज़ामाबाद और मेंडक में भी तनाव बढ़ गया है और हर जगह लोग श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट पर ही चर्चा कर रहे हैं.

टीआरएस और टीडीपी के अलावा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और भारती कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने भी रिपोर्ट पर कड़ी टिप्पणी की है.

भाजपा ने कांग्रेस पर इल्ज़ाम लगाया है कि वह तेलंगाना मामले पर ग़ैर ज़िम्मेदाराना और बचकाना रवैया अपना रहा है जिससे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना दोनों क्षेत्रों को नुक़सान पहुंच रहा है.

भाजपा के प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा,"श्रीकृष्ण रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस जान बूझ कर तेलंगाना राज्य के गठन में देर कर रही है. हम जल्दी से जल्दी तेलंगाना राज्य का गठन चाहते हैं."

सीपीएम ने कहा है कि समिति की रिपोर्ट से भ्रम की स्थिति पैदा हुई है. सीपीएम के राज्य महासचिव के नारायण ने कहा कि केंद्र सरकार को तेलंगाना के गठन में देरी नहीं करनी चाहिए.

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