तेलंगाना में दूसरे दिन भी प्रदर्शन

तेलंगाना प्रदर्शनकारी
Image caption ओस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्र एक बार फिर सड़क पर उतर आए हैं

आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन एक बार फिर ज़ोर पकड़ रहा है.

श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट जारी होने के दूसरे दिन आज भी क्षेत्र में प्रदर्शनों, धरनों और जुलुसों का सिलसिला चलता रहा.

हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय में पुलिस और छात्रों के बीच झड़पें हुईं और पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने जुलूस निकालने के छात्रों के प्रयास को विफल करने के लिए लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले फेंके.

गुरूवार को परिसर में छात्रों पर पुलिस के शक्ति प्रयोग और फ़ायरिंग के विरुद्ध शुक्रवार को पूरे तेलंगाना में स्कूल कॉलेज बंद रहे.

इसके अलावा कई ज़िलों में आम हड़ताल भी रही और लोगों ने जगह-जगह जुलूस निकालकर श्रीकृष्ण समिति से अपनी नाराज़गी व्यक्त की.

राजनीतिक स्तर पर सबसे अहम घटना यह रही कि तेलंगाना से संबंध रखने वाले कांग्रेस के सांसदों, विधायकों और दूसरे नेताओं की एक बैठक हुई जिसमें स्थिति पर विचार किया गया और इस बात पर बहस हुई कि इसमें उन्हें क्या भूमिका निभानी है.

कई नेताओं ने चेतावनी दी की अगर वे अब भी खामोश रहे तो एक ऐसी स्थिति आ जाएगी की वो तेलंगाना क्षेत्र के गाँवों में प्रवेश भी नहीं कर सकेंगे.

बैठक में उस घटना का उल्लेख भी हुआ जिसमें प्रजा राज्यम पार्टी के तेलंगाना से संबंध रखने वाले विधायक को लोगों ने धरनास्थल से मार भगाया क्योंकि उनकी पार्टी तेलंगाना राज्य का विरोध कर रही है.

कांग्रेस पर दबाव

Image caption हैदराबाद में कई स्थानों पर छात्रों की पुलिस के साथ झड़पें हुईं

जनता में कांग्रेस के प्रति बढ़ती नाराज़गी का एक और संकेत उस समय मिला जब तेलंगाना के वकीलों और पत्रकारों के समूह बैठक में घुस पड़े और उनके विरुद्ध नारे लगाने लगे.

वकीलों की मांग थी की तेलंगाना राज्य बनाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव डालने के लिए कांग्रेस के विधायक और सांसद तुरंत इस्तीफ़ा दे दें.

छात्र इस बात पर नाराज़ थे कि सरकार ने समाचार माध्यमों पर कई रोक लगा दी हैं.

कांग्रेस नेताओं में आम भावना यह थी की अगर केंद्र में उनकी सरकार ने संसद के अगले अधिवेशन में तेलंगाना राज्य की स्थापना का विधेयक पेश नहीं किया तो उनके पास त्यागपत्र देने के सिवा कोई रास्ता नहीं रह जाएगा.

एक मंत्री कृष्ण राव ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो वो इस्तीफा दे देंगे.

हालाँकि कांग्रेस आलाकमान ने सांसदों को किसी भी गतिविधि से मना किया था लेकिन बैठक में कई सांसद उपस्थित थे और इससे स्पष्ट था कि उनका संयम टूट रहा है.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर शुक्रवार को पूरे तेलंगाना में सरकारी कर्मचारियों ने दोपहर भोज के दौरान विरोध प्रदर्शन किए और तेलंगाना पर विधेयक लाने की माँग की.

बिजली विभाग के हज़ारों कर्मचारियों की एक रैली हुई जिसमें उन्होंने बिजली की आपूर्ति की व्यवस्था को ही भंग कर देने की धमकी दी.

टीडीपी

विपक्षी दल तेलुगु देसम के तेलंगाना के नेता भी अपना ज़ोर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

हालाँकि उनकी पार्टी ने अब तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि वे तेलंगाना राज्य के पक्ष में हैं या नहीं लेकिन तेलंगाना क्षेत्र के टीडीपी नेताओं ने राज भवन के सामने धरना दिया और राज्यपाल इ एस एल नरसिम्हन को वापस बुलाने की माँग की.

उनका आरोप था कि राज्यपाल तेलंगाना के विरुद्ध काम कर रहे हैं.

टीडीपी के विधायक जनार्दन रेड्डी ने श्रीकृष्ण समिति की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि वो इसकी सिफ़ारिशों को अस्वीकार करते हैं क्योंकि इसमें तेलंगाना के साथ न्याय नहीं किया गया.

इधर ध्यान अब इस बात पर भी है कि इस पूरे मामले में मुस्लिम अल्प संख्यकों का रुख़ क्या है.

श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि जहाँ हैदराबाद नगर के मुसलमानों को तेलंगाना राज्य की माँग में कोई दिलचस्पी नहीं है वहीं ज़िलों में रहने वाले मुसलमान तेलंगाना चाहते हैं.

हैदराबाद की शक्तिशाली मुस्लिम पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन ने तेलंगाना राज्य का विरोध किया है लेकिन कहा है कि अगर तेलंगाना बनना अनिवार्य हो जाता है तो फिर हैदराबाद को तेलंगाना की ही राजधानी बनाना चाहिए.

कई दूसरे मुस्लिम संगठनों ने इस बात का सख्ती से खंडन किया है कि मुसलमान तेलंगाना राज्य के पक्ष में नहीं हैं.

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