विधायक हत्याकांड की सीबीआई जांच

राजकिशोर केसरी
Image caption रुपम पाठक ने विधायक केसरी को चाकू मार दिया था जिसमें केसरी की मौत हो गई थी.

बिहार की नीतीश सरकार ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से राज्य के 'विधायक हत्याकांड' की जांच कराने की सिफारिश की है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को राज्य के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस बाबत पत्र लिख कर अनुरोध किया था.

उनका कहना था कि विपक्षी दलों और महिला संगठनों को इस मामले में राज्य पुलिस से जांच पर कई आपत्तियां हैं. साथ ही मारे गए विधायक के परिजन भी यही चाहते हैं कि मुख्यमंत्री इस मामले को जाँच के लिए सीबीआई को सुपुर्द कर दें.

हालांकि घटना के तुरंत बाद सुशील कुमार मोदी ने इस मामले को सीबीआई को सौपना गैरज़रूरी बताया था. उन्होंने राज्य पुलिस को इसकी जांच के लिए पूरी तरह सक्षम मानते हुए कई ऐसे बयान दे डाले थे जिन्हें जांच को प्रभावित करने वाला सरकारी दबाव समझा जाने लगा था.

मोदी ने कहा था कि भाजपा विधायक राजकिशोर केसरी की हत्या करने वाली महिला रूपम पाठक एक साजिश के तहत केसरी पर यौन शोषण का मनगढ़ंत आरोप लगाती आ रही थी. उन्होंने रूपम पाठक को 'ब्लैकमेलर' तक कह डाला था.

इन्हीं बयानों को विपक्षी दल समेत तमाम महिला संगठनों ने घोर आपत्तिजनक मानते हुए जांच से पहले ही सत्ता पक्ष द्वारा फ़ैसला सुना देने जैसी कार्रवाई कहा था. उधर इस बाबत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खामोशी पर भी सवाल उठने लगे थे.

इसलिए समझा जाता है कि आगे और आलोचना से बचने के लिए नीतीश सरकार ने इस हत्याकांड की सीबीआई से जांच कराने की सिफारिश कर दी है.

लेकिन अभी भी उन लोगों का रोष थमा नहीं है, जो ये मानते हैं कि मारे गए विधायक राजकिशोर केसरी अपने निकट सहयोगी बिपिन राय के साथ मिलकर लम्बे समय से रूपम पाठक का यौन शोषण करते आ रहे थे.

घटना के बाद पूर्णिया से लेकर पटना तक कई महिला संगठनों के अलावा ग़ैर भाजपा-जदयू दलों और मानवाधिकार संगठनों के लोग रूपम पाठक पर हुए कथित यौन अत्याचार के ख़िलाफ़ धरना-प्रदर्शन करने लगे हैं.

उधर पुलिस और सत्ता पक्ष पर ये भी आरोप लग रहा है कि इस हत्याकांड के सिलसिले में पूर्णिया के उस पत्रकार को तो फ़ौरन गिरफ्तार कर लिया गया, जिसने रूपम पाठक की यौन-प्रताड़ना की ख़बर सबसे पहले छापी थी. लेकिन बिपिन राय की गिरफ़्तारी की मांग अनसुनी कर दी गई.

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