केंद्र सहित 11 कंपनियों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित उन 11 कंपनियों को नोटिस जारी किया है जिन्होंने लाइसेंस प्रक्रिया के सभी नियमों का पालन नहीं किया.

2जी स्पेक्ट्रम के लिए आवंटित लाइसेंस रद्द करने और नए तरीके से नीलामी कराए जाने की मांग करने वाली दो याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है.

पहली याचिका जनता पार्टी के नेता सुब्रमन्यम स्वामी ने दायर की है और दूसरी याचिका, जनहित मामलों के वकील एडवोकेट प्रशांत भूषण की है.

जिन कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं उनमें एस्सार, वीडियोकॉन, टाटा-टेली, यूनीनॉर, वोडाफोन और लूप-टेलिकॉम जैसी कंपनियां शामिल हैं.

कोर्ट के आदेश के बारे में जानकारी देते हुए सुब्रमन्यम स्वामी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस मामले में 'टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया' (ट्राई) को भी एक पक्ष के रुप में शामिल किया जाएगा.

इनकी मांग है कि 2जी स्पेक्ट्रम को लेकर दिए गए अभी तक के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएं और इनके लिए फिर से नीलामी कराई जाए.

पिछले हफ़्ते कोर्ट ने सुब्रमन्यम स्वामी की उस दलील को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने खुद को एक सरकारी वकील के तौर पर नियुक्त किए जाने का निवेदन किया था.

इस मामले में अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी.

इससे पहले सुब्रमन्यम स्वामी ने कपिल सिब्बल के उस बयान की भी आलोचना की थी जिसमें उन्होंने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को ग़लत करार दिया था.

कपिल सिब्बल ने कहा था कि सीएजी ने स्पेक्ट्रम आवंटन से सरकारी खज़ाने को 1,76,000 करोड़ रुपये के नुकसान का जो अनुमान लगाया है वह पूरी तरह गलत है. उन्होंने कहा था कि सीएजी जिस आधार पर ये आँकड़े लेकर आया है उसकी कोई बुनियाद नहीं है और उसमें कई ग़लतियाँ हुई है जिसने सनसनी फैलाई.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वो 2जी स्पैक्ट्रम में हुए कथित घोटाले की जाँच की ख़ुद निगरानी करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मामले की जांच 2001 से की जाए. अदालत ने कहा है कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय इस मामले की मिलकर जांच करें.

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