महंगाई पर बैठक बेनतीजा

  • 11 जनवरी 2011

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने खाद्य सामग्री की तेज़ी से बढ़ रहीं कीमतों पर काबू करने के लिए आज एक उच्च स्तरीय बैठक की लेकिन बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल सका.

अब बुधवार को फिर मामले पर बैठक हो सकती है.

बैठक में खाने पीने की चीज़ों की बढ़ती कीमतों खासकर प्याज़, सब्ज़ियाँ, दूध आदि की आसमान छूती क़ीमतों की चर्चा हुई पर सरकारी सूत्रों का कहना है कि बैठक बिना किसी नतीजे पर पहुँचे समाप्त हो गई..

डेढ़ घंटे चली इस बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, कृषि और खाद्य मंत्री शरद पवार, गृह मंत्री पी चिदंबरम,योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया, मंत्रिमंडल सचिव केएम चंद्रशेखर और वित्त मंत्री के आर्थिक सलाहकार कौशिक बासु ने भाग लिया.

मुद्रास्फीति

सरकार की चिंता उस वक़्त बढ़ गई जब दिसम्बर 25 को खत्म होने वाले सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 18.32 प्रतिशत तक पहुँच गई थी.

खुदरा बाज़ार में प्याज़ की क़ीमतें बाज़ार में कमी के कारण 55 से 60 रुपए प्रति किलो तक पहुँच गई थी. हांलाकि सरकारी दुकानों में ये 40रुपए पर बेचा जा रहा था.

बैठक में निर्धनता रेखा से उपर रहने वाले परिवारों के लिए गेहूं और धान की क़ीमत में 40 प्रतिशत बढ़ोतरी करना भी एक मुद्दा था. सरकार ने इस फ़ैसले को हरी झंडी दिखा दी है पर इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है.

खुदरा बाज़ार में चीनी की बढ़ती क़ीमतों के बावजूद चीनी मिलों को पांच लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दिए जाने की भी चर्चा बैठक में होनी तय थी.

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