'भारत स्वास्थ्य पर ध्यान दे'

  • 11 जनवरी 2011
Image caption स्वास्थ्य सेवाओं तक ग़रीबों की पहुँच नहीं है

ब्रिटेन की प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका 'लैंसेट' की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत ने अपनी तेज़ी से बढ़ती आबादी के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया तो देश का आर्थिक विकास ख़तरे में पड़ सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत कई बीमारियाँ महामारी बनने के कगार पर हैं जो अमीरों और ग़रीबों दोनों को प्रभावित कर रही हैं.

लैंसेट में प्रकाशित विस्तृत रिपोर्ट में उपाय के तौर पर कहा गया है कि भारत को अगले दस वर्षों के भीतर एक कारगर राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा शुरू करनी चाहिए.

रिपोर्ट के मुताबिक़, "लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार होने के साथ ही उनकी शारीरिक गतिविधियाँ कम होती जा रही हैं, खानपान में बदलाव की वजह से मोटापा और मधुमेह भी बढ़ता जा रहा है."

रिपोर्ट तैयार करने वालों का कहना है कि भारत के लोगों ने बहुत सारी बुरी आदतें अपना ली हैं जिनकी वजह से उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा है, उनका कहना है कि इसके लिए स्वास्थ्य के बारे में जागरुकता बढ़ाने की ज़रूरत है.

कोई हैरत की बात नहीं है कि इस रिपोर्ट में भारत के ग़रीबों को सबसे बुरी हालत में बताया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि देश के आर्थिक विकास के आँकड़े स्वास्थ्य संबंधी आँकड़ों से मेल नहीं खाते और ग़रीबों के लिए बीमारियों का इलाज करा पाना असंभव सी बात है.

लैंसेट में छपी रिपोर्ट भारत को आगाह करती है कि उसे हृदय रोग, मधुमेह और टीबी जैसी बीमारियों पर काबू पाने को अपना प्राथमिक लक्ष्य बनाना चाहिए.

सुझाव दिया गया है कि तंबाकू और शराब पर टैक्स बढ़ाकर इन बीमारियों से जूझने के लिए धन जुटाया जा सकता है.

लैंसेट ने सात अध्ययन प्रकाशित किए हैं जिनमें विशेषज्ञों ने संक्रामक रोग, बच्चों की हालत और कुपोषण, सुविधाओं के अभाव और इनसे निबटने के उपायों पर रोशनी डाली है.

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