बलात्कार मामले में विधायक पर शिकंजा

Image caption मुख्यमंत्री मायावती पर अपनी पार्टी के विधायक को बचाने का आरोप लग रहा था

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि बांदा के बहुचर्चित शीलू बलात्कार कांड के बारे में सीआईडी की प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट प्राप्त हो गई हैजिसके आधार पर सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी और उनके तीन सहयोगियों के खिलाफ रपट दर्ज कर गिरफ़्तारी के आदेश दे दिए गए हैं.

कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने संवाददाताओं को बताया कि इसके साथ ही पीड़ित युवती शीलू पर विधायक का मोबाइल फ़ोन और पाँच हजार रूपये चोरी करने के आरोप को सही पाया गया हैइसलिए युवती जेल में ही रहेगी.

यह मामला पिछले कई हफ़्ते से चर्चा में है और विपक्ष मुख्यमंत्री मायावती पर विधायक को बचाने का आरोप लगा रहा था.

सरकारी प्रवक्ता ने विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि सीआईडी की रिपोर्ट प्राप्त होते ही कार्यवाही के आदेश दे दिए गए हैं.

इससे पहले मुख्यमंत्री मायावती नेमामले को तूल पकड़ते देख विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी को दल की सदस्यता से निलंबित कर दिया था.

लेकिन विधायक ने दुराचार के आरोपों का खंडन करते हुए पूरे मामले को एक राजनीतिक साज़िश क़रार दिया है.

मामला

पीड़ित युवती के पिता अच्छे लाल बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता बताए जाते हैं.

पहले विधायक परिवार ने पीड़ित लड़की पर चोरी का मुकदमा कायम कराया थाजिसके आधार पर पुलिस ने 15 दिसंबर को युवती को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

Image caption पुलिस ने पीड़ित लड़की को पहले ही चोरी के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था

ख़बरों के अनुसार कथित दुराचार की शिकार शीलू की माँ की मौत हो चुकी है.

वह अपने पिता से नाराज़ होकर सीमावर्ती मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में ग्राम हरनामपुर में अपने ननिहाल में रह रही थी.

बताया जाता है कि ननिहाल वालों ने पैसा लेकर उसकी शादी कर दी थी.

लड़की के परिवार वालों ने तीन नवंबर को शीलू की गुमशुदगी की रपट मध्य प्रदेश के पन्ना पुलिस स्टेशन में लिखाई थी.

बाद में उसके पिता ने विधायक द्विवेदी की मदद से लड़की को खोजकर उसे विधायक के ही घर पर रख दिया.

कुछ दिनों बाद लड़की विधायक के घर से गायब हो गई.

तब चौदह दिसंबर विधायक के बेटे मयंक द्विवेदी ने उस पर मोबाइल फोन और कुछ रुपये चोरी कर गायब होने का मुक़दमा दर्ज़ कराया.

पुलिस के अनुसार लड़की को चोरी के सामान के साथ गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया गया.

आरोप

लेकिन लड़की के भाई का कहना है कि लड़की जब अदालत में पेशी के लिए लायी गई तब उसने आपने साथ विधायक के घर पर दुराचार की बात बताई.

घर वालों को यह भी शिकायत थी कि बांदा के पुलिस अधीक्षक ने गैरकानूनी तौर जेल में जाकर शीलू पर अपना बयान बदलने का दबाव डाला. इसके लिए उसे रुपयों का लालच दिया गया.

पिछली दस जनवरी को शीलू ने अदालत में लिखित बयान देकर अपने साथ बलात्कार की औपचारिक शिकायत दर्ज करायी.

जानकारों का कहना है कानूनन दुराचार पीड़ित युवती का अदालत में बयान बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए उत्तर प्रदेश सरकार के पास इसके अलावा और कोई चारा नही बचा था कि वह विधायक के खिलाफ मुक़दमा दर्ज करके कार्यवाही करने की अनुमति दे.

हालँकि नियमानुसार रपट दर्ज करने के लिए सरकार की अनुमति नही चाहिए.

इस बात पर भी आश्चर्य किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सी आई डी ने युवती पर चोरी का मुकदमा सही पाया हैजबकि आम तौर पर माना जाता है कि विधायक और स्थानीय पुलिस ने लड़की का मुँह बंद करने के लिए उसे चोरी के फर्जी मुक़दमे में जेल भेज दिया था.

मुख्यमंत्री के आदेश पर सीआईडी मामले की जाँच कर रही है, लेकिन विपक्ष संतुष्ट नही है और वह सीबीआई जाँच की माँग कर रहा है.

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