सीबीआई फिर करेगी मालेगांव धमाकों की जांच

स्वामी असीमानंद
Image caption असीमानंद को अजमेर, हैदराबाद और समझौता एक्सप्रेस धमाकों के मामले में गिरफ़्तार किया गया है

मालेगांव बम धमाके के मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने सीबीआई को दोबारा इस मामले की जांच करने की अनुमति दे दी है.

असीमानंद को पिछले साल 19 नवंबर को अजमेर, हैदराबाद और समझौता एक्सप्रेस धमाकों के मामले में गिरफ़्तार किया गया था.

हाल ही में असीमानंद ने अपना जुर्म कुबूल करते हुए कहा था, ''आरएसएस ने अपने कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या करवाई और इससे जुड़े कई लोग इन धमाकों के लिए ज़िम्मेदार थे.''

सीबीआई ने असीमानंद के इक़बालिया बयान के बाद अदालत में अर्ज़ी दी थी कि उसे इस मामले में दोबारा जांच की अनुमति दी जाए.

वर्ष 2006 में मुंबई से सटे मालेगाँव में बम धमाकों को लेकर मुंबई एटीएस ने 2006 में चार्जशीट दाख़िल की थी. इस जांच के ख़िलाफ़ मुस्लिम समाज के दबाव के चलते यह मामला सीबीआई को सौंपा गया.

धमाके से जुड़े होने के आरोप को लेकर नौ मुस्लिम युवक जेल में हैं जबकि चार फ़रार बताए जा रहे हैं. इन धमाकों में कम से कम छह लोग मारे थे.

पुलिस ने कई मुस्लिम युवाओं का संबंध लश्करे तैयबा से होने की बात कही थी और मुंबई बम विस्फोटों में उनके भी शामिल होने का आरोप लगाया था.

लेकिन एक पत्रिका में असीमानंद के अदालत में दिए गए इक़बालिया बयान छपने के बाद इस मामले पर पुलिस की जाँच पर कई सवाल खड़े हो गए हैं.

इक़बालिया बयान

इस बीच मालेगाँव में जिससे भी बात करें सभी जानते हैं कि एक पत्रिका में असीमानंद का इक़बालिया बयान छापा है जिसमें उन्होंने 2006 मालेगाँव धमाकों में हाथ होने की बात कही है.

लोगों का कहना है कि उन्हें पता था कि मालेगाँव का कोई भी मुसलमान मस्जिद और कब्रिस्तान में धमाके की बात सोच भी नहीं सकता.

सबसे ज़्यादा खुशी इस मामले में जेल में बंद युवकों के परिवारवालों को है. वो कहते हैं कि सालों इंतज़ार के बाद जैसे ऊपरवाले ने उनकी सुन ली है.

उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही उनके परिजन घर वापस आएंगे. अब उनके लिए एक एक दिन काटना मुश्किल हो रहा है.

वो बार-बार उन पुलिस अफसरों का ज़िक्र करते हैं जो धमाकों के वक्त मालेगाँव में तैनात थे.

परेशान परिजन

वो बार-बार आपबीती सुनाते हैं कि कैसे उनके अपनों को पुलिस बिना बात के ले गई और मीडिया ने उनके और मालेगाँव के बारे में न जाने क्या क्या कहा.

मालेगाँव के तार पाकिस्तान और लश्करे तैबा जैसे संगठनों से भी जोड़े गए लेकिन आज आखिरकार सच्चाई सामने आ गई और स्थानीय लोगों की बात सच साबित हुई.

ऐसे ही एक कथित आरोपी इक़बाल मक़दूमी अपने बेटे फ़ारुख अनवर के बारे में बात करते करते रो पड़ते हैं.

वो कहते हैं, ''हमने गृहमंत्री आरआर पाटिल से मिलकर बात की थी, उनका कहना है कि आपकी मांग पर ही हमने केस सीबीआई को दे दिया था. अब ये मामला सीबीआई के पास है, और हमारे पास कुछ नहीं रह गया है. हम इस बारे में केंद्र सरकार से संपर्क करेंगे.''

इसी मामले में गिरफ़्तार रईस अहमद की पत्नी बदरूनिसा बेहद गुस्से में थीं.

वो कहती हैं, ''ये लोग हमारे साढ़े चार साल वापस दे नहीं सकते. हमने इस समय में बहुत मुश्किलें झेली हैं.''

यानि लोगों में, खासकर परिवारवालों में बेहद गुस्सा है. उनका कहना है कि उनके साथ भेदभाव हुआ औऱ फिर नाइंसाफ़ी भी हुई और अब जब असीमानंद ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया है तो फिर उन्हें न्याय मिलने में देरी क्यों हो रही है.

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