कश्मीर में सैन्य कटौती की संभावना

भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में तैनात सैनिकों की संख्या में 25 प्रतिशत की कटौती करने की योजना बना रही है.

गृह सचिव जी के पिल्लई ने कहा है कि भारत सरकार को उम्मीद है कि अगले 12 महीनों में जम्मू-कश्मीर में तैनात सैनिकों की संख्या 25 प्रतिशत कम हो जाएगी.

पिल्लई का कहना था, “हमने श्रीनगर में पहले ही सैनिकों की संख्या कम कर दी है क्योंकि आबादी वाले क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तादाद कम से कम होनी चाहिए.”

उन्होंने कहा कि ये क़दम विश्वास बढ़ाने के लिए उठाया जाएगा. भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सेना की तैनाती केवल सीमा पर हो जहां वो घुसपैठ को रोक सकें.

गृह सचिव ने ये बयान जामिया मिलिया इस्लामिया की ओर से कश्मीर पर आयोजित एक गोष्ठी के बाद दिया.

असमंजस की स्थिति

इस बीच भारत के भारत के सेना प्रमुख वीके सिंह ने सेना दिवस की पूर्व संध्या पर पत्रकारों ने पिल्लई के बयान की विस्तृत जानकारी से इंकार किया.

समाचार एजेंसी, पीटीआई के अनुसार उन्हें कहा कि उन्हें अभी भारतीय सेना की संख्या में कटौती की कोई ज़रुरत महसूस नहीं हो रही है.

अगर गृह मंत्रालय अर्ध सैनिक बलों और पुलिस की संख्या कम करना चाहते है, तो इस पर सेना को फ़िलहाल कुछ नहीं कहना है.

उन्होंने कहा, “ हमें अभी तक पता नहीं है कि उनकी सैनिकों को कम करने की क्या योजना है. मुझे पूरा विश्वास है कि ये क़दम विचार विमर्ष के बाद उठाया जाएगा, क्योंकि जम्मू कश्मीर में युनिफाईड हैडक्वार्टर काम करता है. मुमकिन है उन्ही बलों को वहाँ से हटाया जाएगा जो मौजूदा माहौल में सुरक्षा के हिसाब से ज़रुरी नहीं हैं.’’

कश्मीर से प्रतिक्रिया

इस बीच जीके पिल्लई के बयान पर भारत प्रशासित कश्मीर के पृथकतावादी नेताओं की मिश्रित प्रतिक्रिया आई है.

सईद अली शाह गिलानी ने इस घोषणा को बेमानी बताया. उन्होंने सरकार से मांग की है कि फौज को पूरी तरह हटाया जाए.

वहीं हुर्रियत नेता कांफ्रेंस के नेता मिरवैज़ उमर फ़ारुख ने गृह सचिव के बयान का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा, “हम लंबे समय से समयबद्ध तरीक़े से फौज की वापसी की मांग करते रहे है. और ये उस दिशा में पहला कदम हो सकता है.’’

स्वतंत्रता की मांग करने वाले जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता यासिन मलिक का मानना था, “हम स्थिति पर नज़र रखेंगें. अगर सैनिकों की संख्या वाकई कम होती है तो ये एक सकारात्मक बदलाव होगा और कश्मीर समस्या के हल का माकूल माहौल तैयार करेगा.’’

वहीं वहाँ के आम आदमी की भी इस पर मिश्रित प्रतिक्रिया रही. कोई आश्वस्त दिखा तो किसी ने इसे शक की नज़र से देखा.

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