'बलात्कार पीड़ित' लड़की रिहा

पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी
Image caption अभियुक्त विधायक जेल में हैं

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बांदा के बहुचर्चित बलात्कार कांड का स्वतः संज्ञान लेते हुए पीड़ित युवती शीलू निषाद को तत्काल जेल से रिहा करने और उसे सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए.

इसके बाद लड़की को जेल से रिहा भी कर दिया गया है. कोर्ट में अवकाश होने के बावजूद न्यायमूर्ति इम्तियाज़ मुर्तज़ा और न्यायमूर्ति सतीश अग्रवाल की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई के लिए बैठी.

कोर्ट ने पीड़ित युवती की रिहाई के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया.

अदालत ने शीलू के परिवार को भी सुरक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए.

इस बीच सरकार ने अतर्रा थाने के प्रभारी जब्बार खाँ को निलंबित कर दिया गया है. यह पूरा मामला इसी थाने के अंतर्गत चल रहा हैं.

पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट को तार भेज कर फ़रियाद की थी कि ज़िला पुलिस शीलू पर बलात्कार का मुक़दमा वापस लेने का दबाव डाल रही है. याद दिला दें कि युवती शीलू निषाद का आरोप है कि बहुजन समाज पार्टी विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी के घर पर 12 दिसंबर की रात उसके साथ विधायक और उसके साथियों ने बलात्कार किया.

जब वह अपनी जान बचाकर भागी तो उसके ऊपर चोरी का फ़र्जी मुक़दमा क़ायम कर 15 दिसंबर को उसे जेल भेज दिया गया.

निर्दोष

अदालत के आदेश की जानकारी होने के तत्काल बाद कैबिनेट सचिव शशांक शेखर सिंह ने पत्रकारों से संपर्क किया और बताया कि सीआईडी जांच में शीलू को निर्दोष पाया गया है.

इसलिए तत्काल उसे रिहा करने के निर्देश दिए जा रहे हैं.

इससे पहले एक महीने की फ़जीहत के बाद अब मुख्यमंत्री मायावती ने मान लिया है कि उनकी बहुजन समाज पार्टी के विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी और उसके साथियों ने अपनी घिनौनी हरकत को छिपाने के लिए युवती पर चोरी का फ़र्जी मुक़दमा दर्ज करवाकर उसे जेल भिजवा दिया.

शनिवार को अपने 55वें जन्मदिन पर एक सरकारी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि विधायक और उसके साथियों के साथ-साथ इस मामले में दोषी पुलिसवालों को भी सज़ा मिलेगी.

हालांकि अभी सिर्फ़ एक थानेदार पर कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश दिए गए हैं.

मीडिया और विपक्षी दल शुरू से कह रहे थे कि इस मामले में युवती के साथ दुराचार का मामले छिपाने के लिए पुलिस ने सत्तारुढ़ दल के दबाव में पीड़ित नाबालिग लड़की शीलू निषाद को ही जेल भेज दिया.

जेल से पेशी पर आने पर युवती ने अदालत को आपबीती बतायी. तब अदालत के निर्देश पर सरकार ने 12 जनवरी को विधायक और उसके साथयों पर बलात्कार का मुक़दमा कायम करने का निर्णय किया.

लेकिन युवती पर मोबाइल फ़ोन और कुछ रूपये चोरी का मुक़दमा फिर भी सही ठहराया.

साज़िश

चारों तरफ से घिरा होने के बाद विधायक ने गुरुवार को अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया. लेकिन जेल जाते जाते उन्होंने मामले को राजनीतिक साज़िश करार देते हुए अपने विरोधियों से बदला लेने की चेतावनी भी दी.

जन्म दिन समारोह के शुरू में तो मायावती ने विभिन्न सरकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया.

कुछ सरकारी विभागों में समयबद्ध सेवाएँ देने के लिए नए जनहित गारंटी क़ानून का जिक्र किया. अपने संघर्षमय जीवन पर किताब के छठे खंड का विमोचन किया.

फिर भाषण के लगभग अंत में उन्होंने कहा बांदा के बहुचर्चित शीलू बलात्कार कांड का जिक्र छेड़ा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है.

मायावती ने कहा, "सीआईडी इस बात तह में ज़रूर जाएगी कि विधायक और उसके साथियों ने अपनी घिनौनी हरकत छिपाने के लिए कहीं पीड़ित लड़की के ऊपर चोरी का ग़लत आरोप तो नही लगाया है.''

सज़ा

फिर अपनी राय प्रकट करते हुए उन्होंने कहा, ''हालांकि इस मामले में अभी तक लड़की के दिए बयानों से लड़की के ऊपर लगाए गए चोरी के आरोप विधायक और उसके साथयों का अपनी कमज़ोरी को छिपाने के लिए साज़िश प्रतीत हो रहा है.''

मायावती ने कहा कि इस मामले में विधायक और उसके साथियों को ज़रूर कड़ी सज़ा मिलेगी.

मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सीआईडी जांच में लड़की पर चोरी के आरोप फ़र्जी साबित हुए तो उन पुलिस वालों पर भी सख़्त कार्रवाई होगी, जिन्होंने बिना जांच-पड़ताल किए लड़की को फ़र्जी मामले में जेल भेज दिया.

मायावती ने केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली का यह सुझाव भी मान लिया कि जल्दी फ़ैसला करने के लिए यह मामला फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट को सौंप दिया जाए.

इस मामले में गौर करने वाली बात यह है कि युवती के पिता अच्छेलाल निषाद बहुजन समाज पार्टी के सदस्य हैं.

मायावती मंत्रिमंडल में बांदा से दो ताक़तवर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी और बाबू सिंह कुश्वाहा हैं.

फिर भी एक पार्टी कार्यकर्ता को ही न्याय तब तक नहीं मिला जब तक मीडिया और विपक्षी दलों ने लगातार हंगामा नही किया.

कार्रवाई

हाल ही में ऐसे ही एक अन्य मामले में कानपुर में पुलिस ने सत्तारूढ़ दल के एक समर्थक को बचाने के लिए एक निर्दोष को बलात्कार और हत्या के आरोप में जेल भेज दिया.

Image caption मायावती ने जन्मदिन पर कई घोषणाएँ की

पुलिस ने मामले को उजागर करने वाले अख़बार के दफ़्तर पर हमला बोल दिया.

लेकिन कई महीनों की छीछालेदर के बाद दो दिन पहले सरकार ने इस मामले में पुलिस की ग़लती मानी और कई छोटे पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की. लेकिन बड़े अधिकारियों का कुछ नही बिगडा.

अब तक कम से कम छह ऐसे मामले हो चुके हैं, जिनमें सत्तारूढ़ बहुजन समाज पार्टी के विधायक, सांसद या मंत्री गंभीर आपराधिक मामलों में लिप्त थे, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उनका साथ दिया.

मामलों के तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री ने तभी अपने ऐसे नेताओं को जेल भेजा जब वे उनके लिए राजनीतिक रूप से नुक़सानदेह हो गए.

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