आदर्श सोसायटी की इमारत गिरा दी जाए: जयराम रमेश

आदर्श सोसायटी
Image caption करगिल युद्ध लड़ने वालों के लिए प्रस्तावित आदर्श सोसायटी में नौकरशाहों और नेताओं के रिश्तेदारों को फ़्लैट मिले

भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने पाया है कि विवादों में घिरी मुंबई स्थित आदर्श कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी की 31 मंज़िला इमारत का निर्माण अवैध तरीके से, अनिवार्य इजाज़त लिए बिना किया गया और पूरी इमारत को गिरा दिया जाना चाहिए.

मुंबई स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी तब विवादों में घिर गई जब पाया गया कि इसकी इमारत के निर्माण में अनेक स्थानीय नियमों और क़ानूनों का उल्लंघन हुआ था. यही नहीं, कई प्रभावशाली अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के रिश्तेदारों को इस इमारत में फ़्लैट दिए गए.

पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा और कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस की सरकार के उस समय मुख्यमंत्री रहे आशोक चव्हान को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.

विपक्षी दलों ने ये मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया और इस मामले को अपने राष्ट्रव्यापी भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा बनाया हुआ है.

'अन्य उदाहरण होने से दोष कम नहीं होता'

मंत्रालय ने पिछले साल 12 नवंबर को आदर्श सोसायटी को नोटिस जारी किया था और फिर इस मामले में मंत्रालय की सलाहकार नलिनी भट्ट ने रिपोर्ट सैंपी जो मंत्रालय ने स्वीकार कर ली.

मंत्रालय का कहना है कि उसके पास तीन विकल्प थे. पहला विकल्प ये था कि कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन (तटीय नियमन क्षेत्र - 1991) की इजाज़त के बिना अवैध तौर पर बनाई गई पूरी इमारत को गिरा दिया जाए.

पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक दूसरा विकल्प था कि आंशिक तौर पर इमारत पर गिरा दिया जाए और तीसरा विकल्प था कि सरकार इमारत पर नियंत्रण करे और बाद में तय करे कि इसका क्या इस्तेमाल करना है.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने रविवार को अपने बयान में कहा, "यदि दूसरा विकल्प चुना जाता तो इमरात के अवैध निर्माण को जायज़ ठहराए जाने के बराबर होता. तीसरे विकल्प पर चर्चा हुई पर उसका मतलब भी यही होता. इसलिए तथ्यों और परिस्थितियों पर चर्चा के साथ-साथ विश्लेषण करने के बाद मेरा निर्णय है कि पहले विकल्प (यानी पूरी इमारत को गिराने) का फ़ैसला किया जाए."

जयराम रमेश का कहना है कि इसी तरह क़ानून के उल्लंघन के अन्य उदाहरण भी हो सकते हैं लेकिन उससे आदर्श सोसायटी का उल्लंघन कम नहीं हो जाता.

उनका ये भी कहना था कि तटीय नियमन क्षेत्र के तहत इजाज़त लेना की ज़रूरत ही न समझना इस क़ानून की भावना के विरुद्ध जाता है.

'आदेश ग़लत है'

आदर्श हॉउसिंग सोसायटी के वकील सतीश मनीशिंदे का कहना था, ''ये आदेश ग़लत है. पहले दिन से जयराम रमेश ये कहते आए हैं कि इस इमारत को गिराना पड़ेगा. आज वैसे भी रविवार का दिन है मुझे नहीं पता उन्हें ऐसी क्या जल्दी थी, अब जो कार्रवाई होगी अदालत में होगी.''

दूसरी ओर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने आरोप लगाया कि 'आदर्श सोसाइटी करगिल की विध्वाओं के नाम पर किया गया सबसे बड़ा घोटाला है.'

प्रकाश जावड़ेकर का कहना था, ''ये रक्षा मंत्रालय का सबसे बड़ा घोटाला है और जो भी घोटाले हुए है उन सब की जांच होनी चाहिए और दोषियों को एक साल के अंदर सज़ा मिलनी चाहिए.''

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