'बलात्कार पीड़ित' लड़की के बाग़ी तेवर

पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी
Image caption शीलू ने अभियुक्त विधायक को फाँसी देने की मांग की है

उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले की 'बलात्कार पीड़ित' युवती शीलू निषाद ने जेल से रिहा होने के बाद फूलन देवी जैसे बाग़ी तेवर दिखाए हैं.

विपक्षी दलों ने भी गाँव में डेरा दाल दिया है, ताकि अभियुक्त विधायक या पुलिस के लोग युवती का बयान न बदलवा सकें. गाँव में तनाव का माहौल है. पुलिस प्रशासन ने उसके गाँव शहबाजपुर में भारी फ़ोर्स तैनात कर दिया है.

पत्रकारों से बातचीत में शीलू ने कहा, "फांसी की सज़ा हो उसको. अब जेल से बाहर न निकलने पाए. और जो उसके आदमी हैं उनको भी उसी तरह मारा कूटा जाए जिस तरह मुझको मारा है. जेल में बंद करके सज़ा दी जाए.''

शीलू का कहना है कि उसे न्याय तभी मिलेगा, जब इस तरह का दुष्कर्म करने वाले विधायक को फांसी की सजा सुनाई जाएगी.

शीलू ने बाग़ी तेवर दिखाते हुए कहा कि क़ानून सज़ा नहीं दे पाया तो वह बाग़ी बनकर बदला लेगी.

तेवर

युवती के तेवर देखकर लोगों को बुंदेलखंड की ही एक और बाग़ी निषाद युवती फूलन देवी की याद ताज़ा हो गई.

पत्रकारों से बातचीत में शीलू ने बताया कि बांदा के पुलिस कप्तान अनिल दास जेल में उससे मिलने आए थे और छह घंटे तक रहे. पुलिस कप्तान उसके ऊपर दुराचार का आरोप वापस लेने का दबाव डाल रहे थे और यही समझा रहे थे कि विधायक को न फांसो और बयान बदल दो.

चर्चाएं हैं कि पुलिस कप्तान बांदा के ही एक प्रभावशाली मंत्री के दबाव में सत्तारूढ़ दल के विधायक को बचाने का प्रयास कर रहे थे.

युवती का आरोप है कि विधायक पुरुषोत्तम नरेश द्विवेदी ने पहले उसे अपनी बेटी बनाकर अपने घर पर रखा. फिर उसकी नीयत ख़राब हो गई और अपनी पत्नी बनाना चाहता था.

जब वह घर से भाग गई तो उसके लोग पकड़ उसे लाए और उसके साथ ज़बरदस्ती दुराचार किया गया. इसके बाद चोरी का फ़र्जी मुक़दमा लिखाकर उसे जेल भेज दिया गया.

दूसरी ओर विधायक द्विवेदी ने इन आरोपों को झूठा और एक राजनीतिक साज़िश करार दिया है.

अदालत के हस्तक्षेप पर पुलिस ने विधायक और उसके साथियों पर मुक़दमा किया और चारों ओर से घिरा होने पर विधायक ने अपने को पुलिस के हवाले किया. लेकिन जेल जाते समय उन्होंने अपने विरोधियों से बदला लेने की धमकी दी.

सरकार ने सीआईडी जाँच बैठाई. लेकिन अपनी पहली रिपोर्ट में सीआईडी ने युवती पर चोरी का मुक़दमा सही ठहराया.

आदेश

शनिवार को हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए युवती को रिहा करने और उसको सुरक्षा देने का आदेश दिया.

Image caption युवती के गाँव में पुलिस जमी हुई है

इसके बाद मायावती सरकार ने भी आनन-फानन में सीआईडी की दूसरी रिपोर्ट में युवती को निर्दोष होने की बात कही. और शनिवार की शाम युवती जेल से रिहा हो गई.

शीलू ने कहा कि उसकी रिहाई में मायावती का कोई रहम नहीं है. उसे हाईकोर्ट के आदेश पर रिहा किया गया है. , शीलू ने कहा, "मायावती को अगर रिहा करना था तो इससे पहले क्यों नही रिहा कर दिया.''

युवती का कहना है कि वह गाँव में सुरक्षित नहीं है. विपक्षी समाजवादी पार्टी के नेता उसे सुरक्षा के लिहाज से बांदा शहर ले जाना चाहते हैं, लेकिन पुलिस ने लड़की को उसके घर में नज़रबंद जैसा कर दिया है.

बबेरू क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक विशम्भर निषाद का आरोप है कि प्रशासन चाहता है कि वह युवती को मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को सौंप दे. वह उसका बयान बदलवाना चाहते हैं. लेकिन हम लोग ऐसा होने नहीं देंगे. यहीं डटे रहेंगे.

युवती का गाँव शहबाजपुर इस समय पुलिस छावनी में तब्दील हो गया है. हूटर और सायरन बजाती पुलिस की गाडियाँ चक्कर लगा रही हैं. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर हैं. एक अधिकारी ने फोन पर कहा कि गाँव में स्थिति तनावपूर्ण है.

संबंधित समाचार