'राज्य और केंद्र सरकार माफ़ी मांगे'

  • 18 जनवरी 2011
जुनैद
Image caption सोमवार को हैदराबाद में पत्रकार सम्मेलन करते जुनैद, रईस अहमद और अब्दुर रहमान.

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक नबा कुमार सरकार उर्फ़ स्वामी असीमानंद के बम धमाकों में शामिल होने के इक़बालिया बयान ने पूरे देश में हलचल मचादी है.

कुछ दिनों पहले स्वामी असीमानंद ने दिल्ली की एक अदालत में मजिस्ट्रेट के सामने ये क़बूल किया था कि हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर की दरगाह, समझौता ट्रेन और मालेगांव में हुए बम विस्फोटों में उनका हाथ था .

असीमानंद के इस बयान ने हैदराबाद के उन मुस्लिम युवाओं और उनके परिवार वालों के घाव हरे कर दिए हैं जिन्हें मक्का मस्जिद बम धमाके में शामिल होने के आरोप में गिरफ़्तार कर कड़ी यातनाएं दी गई थीं.

गिरफ़्तार किए गए सैकड़ो युवाओं में से तीन डॉक्टर इब्राहीम जुनैद, रईस अहमद और अब्दुल रहीम ने सोमवार को हैदराबाद में एक पत्रकार सम्मलेन में कहा की उन्हें ख़ुशी है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो यानि सीबीआई ने सच्चाई का पता लगा लिया है और असल दोषियों को गिरफ्तार कर लिया है.

डॉ जुनैद ने कहा कि अगर यह मामला हैदराबाद पुलिस के हाथ में होता तो वो अब तक उनलोगों को आतंकवादी साबित कर देती.

पीड़ितों की मांग

पत्रकार सम्मेलन के ज़रिए इन युवाओं और उनके परिवार वालों ने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें भी रखीं.

इनमें राज्य और केंद्र सरकार की ओर से मुस्लिम समुदाय से बिना शर्त माफ़ी मांगना, निर्दोषों को फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ कारवाई करना और प्रभावित युवाओं को उचित मुआवज़ा अदा करना शामिल है.

डॉ जुनैद ने बीबीसी से कहा कि वोह अब तक यह नहीं समझ सके हैं कि मक्का मस्जिद में विस्फोट के बाद पुलिस ने उन्हें क्यों पकड़ा और क्यों उनसे ज़बरदस्ती यह बात मनवाने की कोशिश की गई कि यह विस्फोट उन्होंने किया था.

जुनैद ने कहा,"सरकार को यह बात मालूम करनी चाहिए की क्या इसके पीछे कोई साज़िश है. क्या ये पुलिस वाले हमें फंसा कर असल दोषियों को बचाना चाहते थे".

18 मई 2007 को मक्का मस्जिद में हुए विस्फोट के मामले में हैदराबाद पुलिस ने 100 से ज्यादा मुस्लिम युवाओं को गिरफ़्तार किया था जिन्हें कड़ी यातनाएं दी गईं.

इनमें से 26 युवाओं को बाद में अदालत ने षडयंत्र के आरोप से बरी कर दिया और बाक़ी को पुलिस ने यह धमकी देकर छोड़ दिया कि वे उन्हें दी गई यातनाओं की कहानी किसी को न बताएं.

इन युवाओं के लिए लड़ने वाले संगठन आंध्र प्रदेश नागरिक अधिकार समिति के सचिव लतीफ़ मोहम्मद ख़ान ने कहा कि हैदराबाद, अजमेर और अन्य स्थानों पर बम विस्फोटों में हिन्दू चरमपंथी संगठनों और आरएसएस के लिप्त होने का जो खुलासा हुआ है उस पर भले ही मीडिया को और दूसरों को आश्चर्य हुआ हो, मुसलमानों को नहीं क्योंकि वे हमेशा से यह कहते रहें हैं कि धार्मिक स्थान पर कोई मुस्लमान विस्फोट नहीं कर सकता और इसमें अन्य संगठनों का हाथ हो सकता है.

उन्होंने प्रभावित युवाओं से माफ़ी मांगने और उन्हें मुआवज़ा देने की मांग करते हुए कहा कि जब ऑस्ट्रेलिया की सरकार मोहम्मद हनीफ़ से माफ़ी मांग सकती है और उन्हें कई मिलियन डॉलर का मुआवज़ा दे सकती है तो भारत सरकार ऐसा क्यों नहीं कर सकती.

मोहम्मद हनीफ को चरमपंथी होने के संदेह में ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में पुलिस ने उन्हें निर्दोष बताकर रिहा कर दिया था.

ख़ान ने पूछा, "भारत के प्रधानमंत्री ख़ुद अपने ही देश के नागरिकों के साथ हुए अत्याचार पर माफ़ी मांगने से क्यों हिचकिचा रहे हैं".

ख़ान ने मांग कि कि इन युवाओं के विरुद्ध पुलिस ने जो मामले दर्ज कर रखे हैं उन्हे तुरंत वापस लिया जाए क्योंकि उसमें अभी भी कई युवाओं को भगोड़ा बताया गया है और उन्हें परिशान किया जा रहा है.

प्रभावित युवाओं का कहना है कि अदालत से रिहा होने के बावजूद भी पुलिस उन्हें परिशान करती रहती है. लोग उनसे बात करने से डरते हैं.

डॉ जुनैद ने कहा,"मैं समाज से बिल्कुल कट कर रह गया हूँ".

Image caption असीमानंद के बयान के बाद मक्का मस्जिद धमाके के अलावा दूसरे धमाकों के आरोप में गिरफ़्तार युवा भी इसी तरह की मांग कर रहे हैं.

जुनैद और दूसरे युवाओं ने उन पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ अदालत में एक याचिका दाख़िल किया है. इस याचिका में हर एक युवा के लिए बीस लाख रुपए के मुआवज़े की मांग की गई है.

उनकी मांग है कि मुआवज़ा की राशि सरकार से नहीं बल्कि उन पुलिस अधिकारियों की जेब से ली जाए.

आंध्र प्रदेश में जिन पुलिस अधिकारियों पर प्रताड़ना करने का आरोप है उनमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव त्रिवेदी और हर्ष कुमार गुप्ता सहित पुलिस के कई आला अधिकारी शामिल हैं.

मज़े की बात यह है कि एक ओर मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी कह रहे हैं कि सरकार मुस्लिम समुदाय से माफ़ी मांगने के लिए तैयार है तो दूसरी ओर राज्य सरकार अदालत में इन्हीं पुलिस अधिकारियों का बचाव कर रही है.

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